Mokshada Ekadashi 2023: शास्त्रों में मार्गशीर्ष(अगहन) माह को बड़ा ही पावन महीना माना गया है। इस महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा या मौनी एकादशी भी कहा जाता है।
Mokshada Ekadashi 2023: शास्त्रों में मार्गशीर्ष(अगहन) माह को बड़ा ही पावन महीना माना गया है। इस महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा या मौनी एकादशी भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार द्वापर युग में मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध के दौरान अपने शिष्य अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता जैसे महान ग्रंथ के प्रादुर्भाव के कारण ही इस दिन को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। गीता का ज्ञान हमें दुख, क्रोध, लोभ और अज्ञान के दलदल से बाहर निकलने की प्रेरणा देता है। सत्य, दया, प्रेम और सत्कर्म को अपने जीवन में धारण करने वाला प्राणी ही मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।इस दिन मौन रहने का नियम भी धर्म शास्त्रों में बताया गया है। मौन रहने के लाभ
आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी वाणी का शुद्ध और सरल होना अत्यंत आवश्यक है। मौन वाणी को शुद्ध और नियंत्रित करता है तथा हमारी सोचने-समझने की शक्ति का विकास करता है, इसीलिए हमारे शास्त्रों में मौन के नियम का उल्लेख किया गया है। साधु-संत और विचारक मौन रहकर ध्यान-चिंतन करते हैं, इससे उनकी मानसिक ऊर्जा बढ़ती है। मौन रहकर काम करने से इंद्रियां और कामेंद्रियां एकाग्र हो जाती हैं और काम आसानी से पूरा हो जाता है। तभी तो पूजा-अनुष्ठानों में मौन रहकर कार्य किया जाता है। मनोविज्ञानी भी एकाग्रता,स्मरण शक्ति बढ़ाने,मन को मजबूत बनाने एवं सकारात्मक सोच के लिए मौन रखने की सलाह देते हैं।दैनिक जीवन में भी कार्य करते समय बोलने और मौन रखने का अंतर समझा जा सकता है।जो व्यक्ति मौन रहते हैं उनकी बुद्धि अपेक्षाकृत अधिक स्थिर एवं संतुलित होती है,ऐसा व्यक्ति हानि-लाभ,हित-अहित के प्रसंगों पर भी बड़े धैर्यपूर्वक निर्णंय ले सकता है।