Mohini Ekadashi 2025: इस बार मोहिनी एकादशी पर बेहद शुभ योग बन रहा है, जो कुछ राशियों के लिए भाग्यशाली साबित होगा।
Mohini Ekadashi 2025: 08 मई 2025 को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी है। मोहिनी भगवान विष्णु का एकमात्र स्त्री अवतार है, जिसे उन्होंने समुद्र मंथन के बाद निकले अमृत कलश की रक्षा के लिए धारण किया था।
इस बार मोहिनी एकादशी पर बेहद शुभ योग बन रहा है, जो कुछ राशियों के लिए भाग्यशाली साबित होगा। मोहिनी एकादशी पर तीन राशियों के लिए धन, पारिवारिक सुख और नौकरी में पदोन्नति में वृद्धि होगी। जानिए कौन सी होंगी वो भाग्यशाली राशियां।
08 मई को मोहिन एकादशी पर हर्षण और व्रज योग बन रहा है। इस योग के शुभ प्रभाव से लोगों के जीवन में शुभता आती है। उनके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और धन-संपत्ति में अपार वृद्धि होती है।
मेष - मेष राशि वालों के लिए मोहिनी एकादशी धन के मामले में लाभकारी रहेगी। शुक्र के शुभ प्रभाव से आय में वृद्धि होगी। धन कमाने के नए स्रोत खुलेंगे। संतान की ओर से शुभ समाचार मिल सकता है। रुके हुए काम पूरे होंगे। व्यापार के विस्तार के लिए बनाई गई योजना सफल होगी, जिससे लंबे समय तक धन लाभ होगा। वृश्चिक - वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मोहिनी एकादशी कई शुभ अवसर लेकर आ रही है। आपकी शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति होगी, संतान सुख पाने की इच्छा जल्द पूरी हो सकती है। पारिवारिक सौहार्द बना रहेगा। नौकरी में काम की सराहना होगी। वेतन वृद्धि के प्रबल योग हैं। सिंह - मोहिनी एकादशी पर बन रहे योग के शुभ प्रभाव से सिंह राशि के जातकों का व्यक्तित्व पहले से बेहतर होगा। नौकरीपेशा लोग अपने करियर में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, आय बढ़ाने के कई अवसर मिलेंगे। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ेगी और विवाहित लोगों के लिए भी यह समय अनुकूल साबित होगा।
मोहिनी एकादशी व्रत कथा (Mohini Ekadashi Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है भद्रावती नाम की एक बहुत ही सुंदर नगरी थी जहाँ धृतिमान नाम का राजा राज करता था। राजा बहुत ही धर्मपरायण था। उसके राज में लोग भी धार्मिक कार्यक्रमों में बड़े उत्साह से भाग लेते थे। उसी नगर में धनपाल नाम का एक वैश्य भी रहता था। धनपाल भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त और धर्मपरायण व्यापारी था।
भगवान विष्णु की कृपा से उसके पाँच बच्चे हुए। उसके सबसे छोटे बेटे का नाम धृष्टबुद्धि था। यह नाम उसे उसके निर्लज्ज कर्मों के कारण मिला था। बाकी चार बेटे अपने पिता की तरह बहुत ही नेक थे। लेकिन धृष्टबुद्धि ने ऐसा कोई पाप कर्म नहीं छोड़ा जो उसने न किया हो। तंग आकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया।
भाइयों ने भी ऐसे पापी भाई से नाता तोड़ लिया, जो अपने पिता और भाइयों की मेहनत पर ऐशो-आराम की जिंदगी जीता था। अब वह दर-दर भटकने लगा। ऐशो-आराम तो दूर, उसे खाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। अपने पूर्वजन्म के पुण्य कर्मों के कारण ही वह ऋषि कौण्डिल्य के आश्रम में पहुंचा। वह ऋषि के चरणों में गिर पड़ा। पश्चाताप की अग्नि में जलता हुआ वह पवित्र होने लगा। उसने ऋषि को अपनी पूरी कहानी सुनाई और पश्चाताप का उपाय जानना चाहा। उस समय ऋषि भक्तों का मार्गदर्शन अवश्य करेंगे और पापियों को मोक्ष प्राप्ति का उपाय भी बताएंगे। ऋषि ने कहा कि वैशाख शुक्ल एकादशी बहुत पुण्यदायी है। इसका व्रत करो, मोक्ष मिलेगा। धृष्टबुद्धि ने ऋषि द्वारा बताई गई विधि के अनुसार वैशाख शुक्ल एकादशी अर्थात मोहिनी एकादशी का व्रत किया। इसके बाद उसे पापों से मुक्ति मिली और मोक्ष की प्राप्ति हुई।