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Jaya Parvati Vrat: कब से शुरू होंगे जया पार्वती व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Jaya Parvati Vrat: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके इसी तप, भक्ति और समर्पण की स्मृति में जया पार्वती व्रत रखा जाता है।

Jaya Parvati Vrat
Jaya Parvati Vrat: भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए जया पार्वती व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं और विवाह योग्य कन्याओं द्वारा रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा सुखी वैवाहिक जीवन और मनोवांछित वर की कामना पूरी होती है। हर वर्ष इस व्रत का इंतजार बड़ी श्रद्धा के साथ किया जाता है और इसके आरंभ होने से पहले श्रद्धालु तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि की जानकारी जानना चाहते हैं। क्या आपको पता है कि वर्ष 2026 में जया पार्वती व्रत कब से शुरू होंगे, इनकी सही तिथि क्या है और इनका धार्मिक महत्व क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं।

जया पार्वती व्रत 2026 कब से शुरू होंगे?

हिंदू पंचांग के अनुसार जया पार्वती व्रत आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि से प्रारंभ होकर लगातार पांच दिनों तक रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 27 जुलाई 2026, सोमवार से शुरू होगा। इसके बाद पांच दिनों तक भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाएगी तथा 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को व्रत का समापन होगा।

जया पार्वती व्रत 2026 की तिथियां

व्रत प्रारंभ – 27 जुलाई 2026, सोमवार
पहला दिन – आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी
दूसरा दिन – आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी
तीसरा दिन – आषाढ़ पूर्णिमा
चौथा दिन – श्रावण कृष्ण प्रतिपदा
पांचवां दिन – श्रावण कृष्ण द्वितीया
व्रत समापन – 31 जुलाई 2026, शुक्रवार

शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि 27 जुलाई को उदया तिथि में प्राप्त होगी, इसलिए इसी दिन से जया पार्वती व्रत का आरंभ माना जाएगा। पूजा के लिए प्रातःकाल का समय सबसे शुभ माना जाता है। स्नान के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करना उत्तम माना गया है।

क्या है जया पार्वती व्रत?

जया पार्वती व्रत पांच दिनों तक चलने वाला प्रमुख हिंदू व्रत है। यह भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त उपासना का पर्व माना जाता है। गुजरात में इस व्रत का विशेष महत्व है, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां इसे पूरी श्रद्धा के साथ करती हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में भी यह व्रत रखा जाता है।

जया पार्वती व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके इसी तप, भक्ति और समर्पण की स्मृति में जया पार्वती व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि विवाहित महिलाएं इस व्रत को पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति की कामना से यह व्रत रखती हैं।

पांच दिनों तक कैसे किया जाता है व्रत?

जया पार्वती व्रत में प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। पूजा में जल, दूध, अक्षत, चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। माता पार्वती को चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां और अन्य सुहाग सामग्री भी अर्पित की जाती है। इसके बाद शिव-पार्वती की आरती और व्रत कथा का पाठ किया जाता है।

जया पार्वती व्रत में भोजन के नियम

इस व्रत में सात्विक भोजन करने की परंपरा है। कई स्थानों पर व्रती पांच दिनों तक बिना नमक का भोजन करते हैं, जबकि कुछ लोग केवल फलाहार ग्रहण करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं के अनुसार भोजन के नियमों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है, लेकिन संयम और सात्विकता का पालन सभी जगह समान रूप से किया जाता है।

किन लोगों के लिए विशेष माना जाता है यह व्रत?

यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं और विवाह योग्य कन्याओं द्वारा किया जाता है। विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि, पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने तथा योग्य जीवनसाथी की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं।

जया पार्वती व्रत की पूजा सामग्री

पूजा के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र, जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, अक्षत, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल, चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां, फल और पंचामृत रखा जाता है। पूजा के अंत में शिव-पार्वती की आरती की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।

जया पार्वती व्रत से जुड़ी मान्यताएं

धार्मिक मान्यता है कि इन पांच दिनों तक श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। व्रत के दौरान नियमित रूप से शिव मंत्र, पार्वती स्तुति, शिव चालीसा और आरती का पाठ किया जाता है। कई स्थानों पर अंतिम दिन दान-दक्षिणा देने और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान करने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस प्रकार जया पार्वती व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का एक महत्वपूर्ण पांच दिवसीय धार्मिक पर्व माना जाता है।



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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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