Chaitra Navratri 2025 Maa Chandraghanta: देश में चैत्र नवरात्रि की धूम मची हुई है. नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है. कल चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है,
Chaitra Navratri 2025 Maa Chandraghanta: देश में चैत्र नवरात्रि की धूम मची हुई है. नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है. कल चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है, आज मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम मां चंद्रघंटा है. मां चंद्रघंटा शांति की प्रतीक हैं, इनकी पूजा करने से भक्तों को पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र के बारे में.
मां चंद्रघंटा की पूजा का शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक
अमृत काल
प्रातः 06:50 से प्रातः 08:16 तक
सर्वार्थ सिद्धि योग
02 अप्रैल, प्रातः 11:06 बजे से प्रातः 06:10 बजे तक
रवि योग
02 अप्रैल, प्रातः 11:06 बजे से प्रातः 06:10 बजे तक
विजय मुहूर्त
दोपहर 02:30 बजे से 03:20 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त
शाम 06:38 बजे से शाम 07:01 बजे तक
संध्या संध्या
शाम 06:39 बजे से शाम 07:48 बजे तक
निशिता मुहूर्त
12:01 पूर्वाह्न, 02 अप्रैल से 12:48 पूर्वाह्न, 02 अप्रैल
नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें। फिर मां चंद्रघंटा का ध्यान करें और उनके सामने दीपक जलाएं। अब माता रानी को अक्षत, सिंदूर, फूल आदि अर्पित करें।
मां चंद्रघंटा का भोग
देवी को खीर और रबड़ी जैसी दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। ऐसा माना जाता है कि इससे शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। साधक को आत्मिक शांति मिलती है।
इन लोगों को खास तौर पर मां चंद्रघंटा की पूजा करनी चाहिए
जिन लोगों की कुंडली में शुक्र और मंगल कमजोर हैं, उन्हें मां चंद्रघंटा की पूजा जरूर करनी चाहिए। इससे मंगल और शुक्र के सभी अशुभ प्रभाव खत्म हो जाते हैं। देवी के इस स्वरूप की पूजा करने से साधक के सभी पाप खत्म हो जाते हैं। मां की कृपा से बुरी शक्तियां उसे कभी परेशान नहीं करती हैं।
मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप करने से दुखों से मुक्ति मिलेगी। इन मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।
ॐ श्री शक्तयै नमः
ॐ थम थम ऐम ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे देवदत्तं ह्रीं वाचं मुखं पदं स्तम्भय स्तम्भय ह्रीं ह्रीं जिह्वं कीलय कीलय ह्रीं बुद्धिम विनाशय ह्रीं ॐ थम थम स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
मां चंद्रघंटा का नाम कैसे पड़ा?
दस भुजाओं वाली सिंह पर सवार देवी चंद्रघंटा का स्वरूप अलौकिक है। मां चंद्रघंटा ने अपने सभी हाथों में त्रिशूल, तलवार, धनुष, गदा धारण कर रखा है। उन्होंने दुष्टों का नाश करने के लिए यह रूप धारण किया था। मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मां ने राक्षसों और असुरों का वध करने के लिए अवतार लिया था। यह भी पढ़ें:-