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Chaitra Navratri Day 4 Color: देवी कूष्मांडा को प्रिय है ये रंग और भोग, पूजा के समय पढ़ें कथा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

Chaitra Navratri Day 4 Color: चैत्र नवरात्रि इस साल 30 मार्च से शुरू हो गई है, जो 06 अप्रैल तक चलेगी. बुधवार, 2 अप्रैल को नवरात्रि का चौथा दिन है. नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा की पूजा को समर्पित है.

Chaitra Navratri Day 4 Color
Chaitra Navratri 2025 Day 4 Color: चैत्र नवरात्रि इस साल 30 मार्च से शुरू हो गई है, जो 06 अप्रैल तक चलेगी. बुधवार, 2 अप्रैल को नवरात्रि का चौथा दिन है. नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा की पूजा को समर्पित है. आपको बता दें कि जिस तरह नवरात्रि के 9 दिनों में देवी दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है, उसी तरह इन दिनों में अलग-अलग रंगों (Navratri 2025 Nine days color) का भी महत्व होता है. दिन के हिसाब से रंगों के कपड़े पहनने और देवी को भोग लगाने से माता रानी के सभी रूपों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आज नवरात्रि का चौथा दिन है और इस दिन देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है. ऐसे में मां को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए आज आपको दिन के हिसाब से कपड़े पहनने चाहिए और मां की पूजा करनी चाहिए. आइए जानते हैं नवरात्रि के चौथे दिन का रंग क्या है इसके आलवा मां कुष्मांडा  का स्वरूप, पूजा विधि, कथा के बारे में विस्तार से जानें।

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन का रंग (Colour of the fourth day of Chaitra Navratri)

नवरात्रि के चौथे दिन का रंग नारंगी होता है, जिसे अंग्रेजी में ऑरेंज कलर कहा जाता है. इसीलिए आज के दिन सभी नारंगी रंग के कपड़े पहनते हैं और पूजा में मां को इसी रंग का भोग भी लगाते हैं.

नारंगी रंग का महत्व (Importance Of Orange Color)

हिंदू धर्म और ज्योतिष में नारंगी रंग को बहुत ही शुभ रंग माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस रंग में सकारात्मक ऊर्जा अधिक होती है. नारंगी रंग को धार्मिक और शरद ऋतु का रंग माना जाता है. वहीं ज्योतिष में इस रंग को सूर्य के प्रकाश से जोड़ा जाता है, जो चमक और तेज का प्रतीक है.

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मां कुष्मांडा को नारंगी रंग का भोग लगाएं  (What To Offer To Maa Kushmanda)

इस दिन पूजा के दौरान आप नारंगी रंग के फल और नारंगी रंग का प्रसाद बनाकर देवी कुष्मांडा को चढ़ा सकते हैं.

मां कुष्मांडा पूजा विधि (Maa Kushmanda Puja Vidhi)

इस दिन सुबह स्नान आदि के बाद हरे रंग के वस्त्र पहनें। देवी कुष्मांडा को हरे रंग के वस्त्र, मेहंदी, चंदन चढ़ाएं। मां कुष्मांडा को कुम्हड़े (जिस फल से पेठा बनता है) की बलि चढ़ाएं, साथ ही मालपुए का भोग लगाएं। इस दौरान मंत्र का जाप करें वंदे वंचित कामर्थे चंद्रार्घकृत शेखरम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कुष्मांडा यशस्वनीम्।

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मां कुष्मांडा का स्वरूप (Maa Kushmanda Ka Svaroop)

मां कुष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमंडलु, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा है। मां के आठवें हाथ में जप माला है जो सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली है। इस देवी का वाहन सिंह है। मां के इस स्वरूप की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति आती है।

माँ कुष्मांडा कथा (Maa Kushmanda Katha)

शास्त्रों के अनुसार जब ब्रह्मांड की रचना नहीं हुई थी, तब उसका अस्तित्व ही नहीं था। क्योंकि चारों ओर अंधकार था। तब माँ कुष्मांडा ने अपनी हल्की हंसी (हल्की मुस्कान) से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इन्हें ब्रह्मांड की आदिशक्ति भी कहा जाता है। हल्की हंसी से ब्रह्मांड की रचना करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा पड़ा।

माँ कुष्मांडा में इतनी शक्ति है कि वे सूर्य के घेरे के भीतर भी रह सकती हैं। वे सौरमंडल के भीतर निवास करती हैं। सूर्यलोक के भीतर रहने की क्षमता केवल माँ कुष्मांडा में ही है और उनके तेज से दसों दिशाएँ प्रकाशित होती हैं। कहा जाता है कि उनके तेज से ब्रह्मांड की सभी वस्तुएँ और जीव प्रकाशित होते हैं। सच्चे मन से देवी कुष्मांडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है। इनकी पूजा करने से रोग और शोक दूर होते हैं और यश और आयु में वृद्धि होती है।

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