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Anant Chaturdashi: अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के किस स्वरूप की करें पूजा? जानें विधि और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Anant Chaturdashi: अनंत चतुर्दशी की पूजा के लिए भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र, शेषनाग की प्रतिमा या चित्र, कलश, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और फल आदि रखे जाते हैं।

Anant Chaturdashi
Anant Chaturdashi: अनंत चतुर्दशी का पर्व भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ अनंत सूत्र धारण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के उस स्वरूप की पूजा की जाती है जो अनंत और शेषनाग से जुड़ा हुआ है। इस दिन पूजा में भगवान विष्णु के साथ शेषनाग और माता यमुना की भी पूजा का विधान बताया गया है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को मनाई जाएगी। क्या आपको पता है कि इस दिन भगवान विष्णु के किस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए और अनंत सूत्र का क्या महत्व है? आइए जानते हैं।

भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा

अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक परंपरा में भगवान के इस स्वरूप को अनंत भगवान कहा गया है। अनंत का अर्थ है जिसका कोई अंत नहीं है। इस स्वरूप में भगवान विष्णु की शेषनाग पर विराजमान छवि का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विराजमान रहते हैं। इसलिए अनंत चतुर्दशी की पूजा में भगवान विष्णु के साथ शेषनाग का भी विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भक्त भगवान अनंत से सुख, शांति और परिवार की मंगलकामना करते हुए पूजा करते हैं। 

 

vishnu ji

2026 में कब है अनंत चतुर्दशी?

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी और 25 सितंबर की रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। इसी कारण अनंत चतुर्दशी का पर्व 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूजा के समय में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।

पूजा के लिए क्या रखें?

अनंत चतुर्दशी की पूजा के लिए भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र, शेषनाग की प्रतिमा या चित्र, कलश, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और फल आदि रखे जाते हैं। पूजा में अनंत सूत्र का विशेष महत्व होता है। अनंत सूत्र सामान्यतः लाल रंग के धागे का होता है और इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता में इन 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़ा जाता है। भगवान विष्णु की पूजा के बाद इस सूत्र को धारण करने की परंपरा है।

ऐसे करें भगवान अनंत की पूजा

अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को साफ करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें। सामने कलश स्थापित करके भगवान विष्णु और शेषनाग का ध्यान करें। सबसे पहले भगवान विष्णु को जल अर्पित करें। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान को फल और नैवेद्य चढ़ाएं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ भगवान विष्णु का प्रमुख मंत्र माना जाता है। इसके बाद अनंत भगवान का ध्यान करते हुए अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें। पूजा पूरी होने के बाद भगवान की आरती करें।

 

Anant Chaturdashi

अनंत सूत्र का है विशेष महत्व

अनंत चतुर्दशी की पूजा में अनंत सूत्र को भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है। मान्यता है कि पूजा के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण किया जाता है। पुरुष इसे दाहिनी बांह में और महिलाएं बाईं बांह में धारण करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत सूत्र भगवान अनंत की स्मृति और उनके प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। इसे धारण करने से पहले भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है। 

अनंत चतुर्दशी की कथा

अनंत चतुर्दशी से जुड़ी कथा में ऋषि कौण्डिल्य और उनकी पत्नी सुशीला का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार, सुशीला ने अनंत व्रत की विधि जानकर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण किया था। जब ऋषि कौण्डिल्य ने यह सूत्र देखा तो उन्होंने इसके महत्व को समझे बिना उसका अनादर कर दिया और सूत्र को तोड़ दिया।

इसके बाद उनके जीवन में परेशानियां आने लगीं। जब उन्हें अनंत भगवान के अनादर का कारण पता चला तो उन्होंने पश्चाताप किया और भगवान अनंत की खोज में निकल पड़े। कथा के अनुसार, भगवान ने उन्हें दर्शन देकर अनंत व्रत करने का विधान बताया। इसके बाद ऋषि कौण्डिल्य ने विधिपूर्वक व्रत किया। यही कथा अनंत चतुर्दशी के धार्मिक महत्व से जुड़ी प्रमुख कथाओं में बताई जाती है। 

भगवान विष्णु के साथ इनकी भी पूजा

अनंत चतुर्दशी पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। इसके साथ शेषनाग और माता यमुना की पूजा का भी विधान बताया गया है। धार्मिक मान्यता में शेषनाग को भगवान विष्णु की शय्या और अनंत स्वरूप से जोड़ा जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। पूजा के बाद अनंत सूत्र धारण किया जाता है और भगवान विष्णु से परिवार की सुख-शांति तथा मंगल की प्रार्थना की जाती है।

गणेश विसर्जन से भी जुड़ा है दिन

अनंत चतुर्दशी का संबंध केवल भगवान विष्णु की पूजा से ही नहीं है। इसी दिन गणेश उत्सव का समापन भी होता है और कई स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। हालांकि अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के कारण भी विशेष माना जाता है। 


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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