facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  vrat  aja ekadashi 2026 ka vrat kab rakha jayega know date shubh muhurata pujan vidhi dharmik mahatva vrat katha

Aja Ekadashi 2026: कब रखा जाएगा अजा एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Aja Ekadashi Date: हिंदू धर्म में प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। 

Aja Ekadashi
Aja Ekadashi: भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह एकादशी व्रत धार्मिक दृष्टि से विशेष माना गया है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपवास रखते हैं। इस साल अजा एकादशी की तिथि को लेकर अगर आपके मन में भी असमंजस है कि व्रत किस दिन रखा जाएगा, एकादशी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी और पारण का सही समय क्या रहेगा, तो आइए जानते हैं अजा एकादशी 2026 की पूरी जानकारी..

कब है अजा एकादशी

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा। यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि होगी। एकादशी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर की शाम 7 बजकर 29 मिनट से होगी और इसका समापन 7 सितंबर की शाम 5 बजकर 03 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 7 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। अजा भगवान विष्णु के नामों में से एक माना गया है। धार्मिक परंपरा में ‘अजा’ का अर्थ अजन्मा यानी जिसका जन्म नहीं हुआ, ऐसा बताया गया है। इसी कारण इस एकादशी का संबंध भगवान विष्णु की आराधना से जोड़ा जाता है।

अजा एकादशी से जुड़ी है राजा हरिश्चंद्र की कथा

अजा एकादशी के महत्व को समझाने के लिए धार्मिक ग्रंथों में राजा हरिश्चंद्र की कथा का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र अपने जीवन में बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे थे। उन्हें अपना राज्य, धन और परिवार तक छोड़ना पड़ा था। कहा जाता है कि एक समय ऋषि गौतम ने राजा हरिश्चंद्र को अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ऋषि के बताए अनुसार राजा ने श्रद्धा के साथ अजा एकादशी का व्रत रखा और भगवान विष्णु की आराधना की। उन्होंने रात्रि जागरण भी किया।

धार्मिक कथा के अनुसार, व्रत के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र के जीवन की कठिन परिस्थितियां समाप्त हुईं और उन्हें अपना राज्य दोबारा प्राप्त हुआ। उनकी पत्नी और पुत्र से भी उनका मिलन हुआ। इसी कथा के कारण अजा एकादशी को विशेष फल देने वाली एकादशी के रूप में धार्मिक परंपरा में बताया गया है। 

कैसे करें अजा एकादशी की पूजा

अजा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान की साफ-सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।

भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र, तुलसी की पत्तियां और फल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु से संबंधित धार्मिक पाठ का श्रवण और पाठ किया जा सकता है।

एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने की भी परंपरा है। पूजा के दौरान भगवान को तुलसी दल अर्पित करना विशेष माना जाता है। तुलसी अर्पित करते समय श्रद्धालुओं को धार्मिक विधि और अपनी पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।

अजा एकादशी व्रत में क्या करें

अजा एकादशी के दिन श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं। जो लोग निर्जल व्रत नहीं रख सकते, वे फल, दूध और एकादशी व्रत में खाए जाने वाले सात्विक आहार का सेवन कर सकते हैं।

इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण करने, भजन-कीर्तन करने और धार्मिक कथा सुनने की परंपरा है। कई श्रद्धालु एकादशी की रात भगवान विष्णु की आराधना करते हुए जागरण भी करते हैं। धार्मिक मान्यता में अजा एकादशी की व्रत कथा सुनने और भगवान विष्णु की पूजा करने को विशेष महत्व दिया गया है।

अजा एकादशी का पारण कब होगा

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर, मंगलवार को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 6 बजकर 02 मिनट से 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को इसी अवधि में विधि के अनुसार व्रत खोलना चाहिए।


यह भी पढ़ें-

Shivling Parikrama: शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसका कारण 

Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व 

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है? जानिए धार्मिक मान्यता 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel