Bhadrapada Kalashtami: कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान काल भैरव भगवान शिव का ही एक उग्र स्वरूप हैं। उन्हें काल का स्वामी और काशी का क्षेत्रपाल भी माना जाता है।
Bhadrapada Kalashtami: हिंदू धर्म में हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप माने जाने वाले भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। भाद्रपद महीने की कालाष्टमी इस बार विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसी तिथि पर भगवान भैरव की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। क्या आपको पता है कि भाद्रपद कालाष्टमी इस बार किस दिन पड़ रही है? पूजा के लिए कौन-सा समय शुभ रहेगा और इस दिन भगवान काल भैरव की आराधना क्यों की जाती है? आइए जानते हैं भाद्रपद कालाष्टमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व...
भाद्रपद कालाष्टमी कब है?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर, शुक्रवार को पड़ेगी। इसी दिन भाद्रपद कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। भाद्रपद मास की शुरुआत 29 अगस्त 2026 से हुई है और कृष्ण पक्ष की अष्टमी 4 सितंबर को रहेगी। पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी, इसलिए उदया तिथि के आधार पर कालाष्टमी का व्रत 4 सितंबर को रखा जाएगा।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान काल भैरव भगवान शिव का ही एक उग्र स्वरूप हैं। उन्हें काल का स्वामी और काशी का क्षेत्रपाल भी माना जाता है। काल भैरव की पूजा विशेष रूप से भय, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं से रक्षा के लिए की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में काल भैरव को दंडाधिकारी का स्वरूप भी माना गया है। कहा जाता है कि भगवान काल भैरव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि कालाष्टमी के दिन भक्त श्रद्धा के साथ भगवान भैरव की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं।
हर महीने आती है कालाष्टमी
कालाष्टमी केवल भाद्रपद महीने में ही नहीं आती, बल्कि प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। साल की सभी कालाष्टमी में मार्गशीर्ष महीने की कालाष्टमी को विशेष महत्व प्राप्त है, जिसे कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता है। भाद्रपद की कालाष्टमी भी भगवान काल भैरव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त भगवान भैरव की पूजा करके उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।
कैसे करें काल भैरव की पूजा?
कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव और भगवान काल भैरव का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर भगवान काल भैरव की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके विधि-विधान से पूजा की जाती है। भगवान काल भैरव को फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही भगवान शिव का अभिषेक करना भी शुभ माना जाता है। काल भैरव की पूजा में उनकी आरती और मंत्र जाप करने की भी परंपरा है। कई स्थानों पर कालाष्टमी के दिन शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक और भगवान भैरव की पूजा की जाती है। भजन-कीर्तन और दीपदान भी इस दिन की धार्मिक परंपराओं में शामिल हैं।
रात में पूजा का है विशेष महत्व
कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा रात के समय करने की परंपरा भी प्रचलित है। भक्त शाम के बाद भगवान भैरव का पूजन करते हैं और दीप जलाते हैं। कई भक्त इस दिन मंदिर जाकर काल भैरव के दर्शन करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, काल भैरव की पूजा में श्रद्धा और नियम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान करते हुए मंत्र जाप किया जाता है।
कालाष्टमी पर व्रत का नियम
कालाष्टमी के दिन भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं, जबकि कुछ फलाहार करके व्रत करते हैं। व्रत रखने वाले भक्त सात्विक भोजन का सेवन करते हैं और भगवान काल भैरव की पूजा के बाद व्रत का पारण करते हैं। इस दिन मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहने की धार्मिक परंपरा है। भगवान भैरव की पूजा में शुद्धता और सात्विक भाव का विशेष ध्यान रखा जाता है।
भैरव पूजा में काले कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा
काल भैरव के साथ कुत्ते का विशेष संबंध माना जाता है। धार्मिक मान्यता में कुत्ते को भगवान काल भैरव का वाहन बताया गया है, इसलिए कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा भी है। भक्त इस दिन कुत्ते को भोजन कराते हैं और भगवान काल भैरव से सुख-शांति तथा बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। इसे काल भैरव की आराधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
भाद्रपद कालाष्टमी पर क्या करें?
भाद्रपद कालाष्टमी के दिन भगवान शिव और काल भैरव का स्मरण करना शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद पूजा करें, भगवान शिव का अभिषेक करें और काल भैरव की आरती करें। श्रद्धा के अनुसार व्रत रखें और शाम या रात में भगवान काल भैरव की पूजा करें। इस दिन मंदिर में दीपदान करना, भगवान भैरव का ध्यान करना और जरूरतमंदों को दान देना भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। काल भैरव की पूजा करते समय मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव रखना विशेष माना गया है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)