Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। इन दिनों परिवार के लोग अपने दिवंगत पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा से किए गए इन कार्यों से पितरों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार को मिलता है। पितृ पक्ष में सिर्फ श्राद्ध कर्म ही नहीं, बल्कि अन्न-जल का दान और जीवों को भोजन कराना भी महत्वपूर्ण माना गया है। क्या आपको पता है कि पितृ पक्ष में किन कामों को करने से पितर प्रसन्न होते हैं? आइए जानते हैं।
तर्पण जरूर करें
पितृ पक्ष में पितरों के लिए तर्पण करना प्रमुख कर्म माना जाता है। इसमें जल के साथ काले तिल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि तर्पण के जरिए पितरों को जल अर्पित किया जाता है और इससे उन्हें तृप्ति मिलती है। श्राद्ध और तर्पण के लिए पितर की मृत्यु तिथि के अनुसार दिन निर्धारित किया जाता है। तर्पण करते समय मन में पितरों का स्मरण करना चाहिए और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करनी चाहिए। धार्मिक परंपरा में इसे पितृ ऋण चुकाने का एक माध्यम भी माना गया है।
पिंडदान करें
पितृ पक्ष में पिंडदान का भी विशेष महत्व बताया गया है। पिंड सामान्य तौर पर चावल, जौ, तिल और घी आदि से बनाए जाते हैं और इन्हें पितरों को समर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पिंडदान से पितरों की तृप्ति और उनकी सद्गति की कामना की जाती है। अगर किसी परिवार में पिंडदान की परंपरा है तो इसे अपनी कुल परंपरा और जानकार आचार्य की सलाह के अनुसार करना उचित माना जाता है।
कौए को भोजन कराएं
पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने की परंपरा काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता में कौए को पितरों का दूत माना गया है। श्राद्ध का भोजन तैयार करने के बाद उसका एक हिस्सा कौए के लिए निकाला जाता है। मान्यता है कि कौए के रूप में पितर श्राद्ध का भोजन स्वीकार करते हैं। इसलिए पितृ पक्ष में श्रद्धा से कौए को भोजन कराना पितरों को प्रसन्न करने वाला कार्य माना जाता है।
गाय और कुत्ते को खिलाएं
श्राद्ध के भोजन में से गाय और कुत्ते के लिए भी हिस्सा निकालने की परंपरा है। गरुड़ पुराण से जुड़ी धार्मिक व्याख्याओं में श्राद्ध के भोजन को गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों को अर्पित करने का उल्लेख मिलता है। पितृ पक्ष में गाय को हरा चारा या भोजन खिलाना और कुत्ते को भोजन कराना सेवा के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि सभी जीवों के प्रति दया और भोजन का दान पितरों के प्रति श्रद्धा का ही एक रूप है।
ब्राह्मण भोजन कराएं
श्राद्ध कर्म में ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी परंपरा है। घर में श्रद्धा से सात्विक भोजन बनाकर उन्हें भोजन कराया जाता है और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपयोगी वस्तुओं का दान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध का भोजन पितरों को समर्पित भाव से कराया जाता है। इसलिए भोजन कराते समय मन में पितरों का स्मरण और उनके लिए प्रार्थना करने का महत्व बताया गया है।
जरूरतमंदों को दान दें
पितृ पक्ष में अन्न, वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। खासतौर पर जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और उसकी आवश्यकता के अनुसार मदद करना पितरों के नाम से किए जाने वाले अच्छे कार्यों में शामिल किया जाता है। दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सामर्थ्य को महत्व देना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि पितरों के निमित्त किया गया अन्नदान और सेवा परिवार में सुख-शांति की कामना से जुड़ा होता है।
चींटियों को भी दें भोजन
पितृ पक्ष में पंचबलि की परंपरा के तहत चींटियों के लिए भोजन निकालने का भी उल्लेख मिलता है। आटे और चीनी जैसी चीजें चींटियों को खिलाई जाती हैं। इसे छोटे-छोटे जीवों के प्रति दया और भोजन उपलब्ध कराने की परंपरा के रूप में देखा जाता है। पितरों के नाम से जीवों को भोजन कराना श्राद्ध कर्म का एक हिस्सा माना जाता है।
घर में रखें सात्विक वातावरण
पितृ पक्ष में पितरों का स्मरण करते हुए घर में शांत और श्रद्धापूर्ण वातावरण रखने की परंपरा है। इन दिनों श्राद्ध कर्म, तर्पण, दान और सेवा जैसे कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों को याद करके उनके लिए प्रार्थना करने से परिवार में उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना बनी रहती है। पितृ पक्ष 2026 में 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। इन दिनों पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण किए जाएंगे।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)