Pitru Dosh: पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान के साथ दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किए गए दान से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कई धार्मिक मान्यताओं में पितृ दोष को दूर करने के लिए भी पितृ पक्ष में दान और श्राद्ध कर्म को महत्वपूर्ण बताया गया है। क्या आपको पता है कि पितृ पक्ष में किन चीजों का दान करना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं।
कब से शुरू होगा पितृ पक्ष 2026
साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से होगी। इस दौरान पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा है। 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 20 अक्टूबर को होगी।
काले तिल का दान
पितृ पक्ष में काले तिल का दान विशेष माना जाता है। श्राद्ध और तर्पण के दौरान भी तिल का प्रयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, काले तिल से तर्पण करने और इसका दान करने से पितरों की तृप्ति होती है। पितृ पक्ष में जरूरतमंद व्यक्ति या किसी योग्य व्यक्ति को काले तिल का दान किया जा सकता है।
अन्न का दान
पितृ पक्ष में अन्न दान को भी महत्वपूर्ण माना गया है। चावल, गेहूं, आटा, दाल और अन्य खाद्य सामग्री का दान जरूरतमंद लोगों को किया जा सकता है। श्राद्ध कर्म में भोजन का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस दौरान अन्न दान को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम माना जाता है।
कपड़ों का दान
पितृ पक्ष में जरूरतमंद लोगों को कपड़े दान करने की भी परंपरा है। साफ और उपयोग करने योग्य कपड़े दान किए जा सकते हैं। सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर वस्त्र दान को भी शुभ माना गया है।
गुड़ और घी का दान
पितृ पक्ष में गुड़ और घी का दान भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन वस्तुओं का दान पितरों के निमित्त पुण्यकारी माना जाता है। इन्हें अन्न या भोजन सामग्री के साथ जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जा सकता है।
चांदी का दान
श्राद्ध कर्म में चांदी को भी विशेष महत्व दिया गया है। सामर्थ्य के अनुसार चांदी की कोई छोटी वस्तु दान करने की परंपरा है। हालांकि, दान हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए। महंगे सामान का दान करना जरूरी नहीं है।
जल और भोजन का दान
पितृ पक्ष में प्यासे और जरूरतमंद लोगों को पानी पिलाना तथा भोजन कराना भी पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में श्राद्ध के दौरान ब्राह्मण भोजन के साथ गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए भोजन निकालने की परंपरा भी बताई गई है। इसे पंचबलि कहा जाता है।
गाय के लिए चारा
पितृ पक्ष में गाय को हरा चारा खिलाने की भी परंपरा है। सर्वपितृ अमावस्या पर गाय को चारा खिलाना और जरूरतमंदों को भोजन कराना विशेष रूप से किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह के सेवा कार्य पितरों के निमित्त किए गए पुण्य कर्म माने जाते हैं।
दक्षिणा का दान
श्राद्ध कर्म के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देना भी परंपरा का हिस्सा है। दक्षिणा के साथ अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री दी जा सकती है। इसका उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि श्रद्धा के साथ दान-पुण्य करना माना गया है।
पितृ दोष से जोड़कर क्यों देखा जाता है दान
धार्मिक मान्यताओं में पितृ दोष का संबंध पूर्वजों के प्रति अधूरे श्राद्ध कर्म या पितृ ऋण से जोड़ा जाता है। इसी वजह से पितृ पक्ष में तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा से किए गए कर्मों से पितरों की संतुष्टि होती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
दान करते समय रखें ध्यान
पितृ पक्ष में दान करते समय सबसे जरूरी बात श्रद्धा और सामर्थ्य है। दिखावे के लिए महंगा दान करने के बजाय जरूरतमंद व्यक्ति को उसकी जरूरत की वस्तु देना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। श्राद्ध यदि पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात हो तो उसी तिथि पर करना चाहिए। मृत्यु तिथि ज्ञात न होने की स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)