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Shubh Yoga: क्या होता है शुभ योग? यदि सफलता पाना चाहते हैं तो जान लीजिए किस योग में करें कौन सा काम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी
सार

Shubh Yoga: ज्योतिष शास्त्र में शुभ योग का विशेष महत्व है। ये योग सूर्य और चंद्रमा की विशेष दूरी और स्थिति के आधार पर बनते हैं और हमारे जीवन के हर कार्य को प्रभावित करते हैं। 

शुभ योग
Shubh Yoga: ज्योतिष शास्त्र में शुभ योग का विशेष महत्व है। ये योग सूर्य और चंद्रमा की विशेष दूरी और स्थिति के आधार पर बनते हैं और हमारे जीवन के हर कार्य को प्रभावित करते हैं। हिंदू पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। शुभ योग में किए गए कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है, जबकि अशुभ योग में कार्य शुरू करने से बाधाएं और असफलता का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि क्या है शुभ योग के अर्थ, उनके प्रकार के बारे में...
शुभ योग

शुभ योग क्या होता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, योग सूर्य और चंद्रमा के बीच की कोणीय दूरी यानी देशांतर के आधार पर बनते हैं। इनकी गणना 13 डिग्री और 20 मिनट के हिसाब से की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप कुल 27 योग बनते हैं। ये योग हमारे दैनिक जीवन, कार्यों और निर्णयों पर गहरा प्रभाव डालते हैं। प्रत्येक योग का अपना विशेष प्रभाव होता है, जो शुभ या अशुभ हो सकता है। शुभ योग वे हैं, जो कार्यों में सफलता, समृद्धि, और सकारात्मक परिणाम लाते हैं। इनमें से 18 योग शुभ माने जाते हैं, जबकि 9 योग अशुभ माने जाते हैं।
शुभ योग में कार्य शुरू करने से न केवल बाधाएं कम होती हैं, बल्कि कार्य की गुणवत्ता और परिणाम भी बेहतर होते हैं, जैसे- विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यवसाय शुरू करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ योग का चयन अनिवार्य है।
27 योग और उनके प्रभाव
ज्योतिष में 27 योगों के नाम हैं- विष्कुंभ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगंड, सुकर्मा, धृति, शूल, गंड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातिपात, वारियान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्मा, इंद्र और वैधृति।  ये 18 योग शुभ माने गए हैं।
इनमें से नौ अशुभ योग हैं- विष्कुंभ, अतिगंड, शूल, गंड, व्याघात, वज्र, व्यतिपात, परिघ, और वैधृति। बाकी 18 योग शुभ माने जाते हैं।
 
शुभ योग

शुभ योग में कौन सा कार्य करें?

प्रीति योग: यह योग प्रेम, मेल-मिलाप, और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने के लिए शुभ है। इस योग में विवाह, सगाई जैसे मांगलिक कार्य, दोस्तों या रिश्तेदारों से संबंध सुधारने और प्रेम विवाह की शुरुआत करना उत्तम होता है। यह योग सामाजिक मान-सम्मान बढ़ाने में भी सहायक है।
सौभाग्य योग: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह योग सौभाग्य और समृद्धि लाता है। विवाह, गृह प्रवेश, और नए व्यवसाय की शुरुआत के लिए यह योग अत्यंत शुभ है। इस योग में किए गए मांगलिक कार्य वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाते हैं।
शोभन योग: यह योग यात्रा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यदि आप किसी कार्य के लिए यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस योग में यात्रा शुरू करने से उद्देश्य की पूर्ति होती है। यह योग व्यापारिक यात्राओं और तीर्थ यात्राओं के लिए भी उत्तम है।
सुकर्मा योग: नौकरी या करियर से संबंधित कार्यों के लिए यह योग श्रेष्ठ है। नई नौकरी शुरू करना, नौकरी के लिए आवेदन करना या प्रमोशन के लिए प्रयास करना इस योग में सफल होता है।
धृति योग: घर से संबंधित कार्य, जैसे नया घर खरीदना, निर्माण कार्य शुरू करना या गृह प्रवेश, इस योग में करना शुभ माना जाता है। यह योग स्थिरता और दीर्घकालिक सफलता प्रदान करता है।
वृद्धि योग: इस योग में शुरू किए गए कार्यों में वृद्धि और प्रगति होती है। नया व्यवसाय, निवेश या कोई रचनात्मक कार्य शुरू करने के लिए यह योग अत्यंत उपयुक्त है। इस योग में कोई रुकावट या विवाद नहीं होता।
ध्रुव योग: स्थिर और दीर्घकालिक कार्यों, जैसे भवन निर्माण, दुकान का उद्घाटन, या स्थायी निवेश के लिए यह योग उत्तम है। अस्थिर कार्य, जैसे वाहन खरीदना, इस योग में नहीं करना चाहिए।
हर्षण योग: यह योग खुशी और उत्साह का प्रतीक है। इस योग में किए गए कार्य सकारात्मक परिणाम और आनंद प्रदान करते हैं। सामाजिक आयोजन, उत्सव, या रचनात्मक कार्यों के लिए यह योग शुभ है।
सिद्धि योग: मंत्र जाप, आध्यात्मिक साधना और प्रभु का नाम स्मरण करने के लिए यह योग सर्वोत्तम है। इस योग में शुरू किए गए कार्यों में निश्चित सफलता मिलती है।
सिद्ध योग: नई स्किल सीखने, शिक्षा शुरू करने, या गुरु से मंत्र दीक्षा लेने के लिए यह योग अति उत्तम है। इस योग में किए गए कार्यों में पूर्णता और सफलता प्राप्त होती है।
साध्य योग: विद्या, कला, या किसी नई तकनीक को सीखने के लिए यह योग शुभ है। इस योग में मन लगता है और कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त होती है।
शुभ योग: जनहितकारी कार्य, सामाजिक सेवा, या कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए यह योग श्रेष्ठ है। इस योग में किए गए कार्य प्रसिद्धि और सम्मान दिलाते हैं।
शुक्ल योग: यह योग मंत्र सिद्धि, गुरु कृपा, और आध्यात्मिक कार्यों के लिए शुभ है। इस योग में शुरू किए गए कार्यों में स्पष्टता और सफलता मिलती है।
ब्रह्म योग: शांति स्थापना, विवाद सुलझाने, या मध्यस्थता के कार्यों के लिए यह योग लाभकारी है। इस योग में किए गए प्रयास हमेशा सफल होते हैं।
इंद्र योग: राजकीय कार्य, सरकारी अनुबंध, या प्रशासनिक कार्यों के लिए यह योग शुभ है। हालांकि, रात के समय इस योग में कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
वरियान योग: मंगलदायक कार्यों, जैसे विवाह, सगाई, या सामाजिक समारोह के लिए यह योग शुभ है। लेकिन पितृ कार्य इस योग में नहीं करने चाहिए।
शिव योग: मंत्र जाप और आध्यात्मिक साधना के लिए यह योग अति शुभ है। इस योग में प्रभु का नाम लेने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 

शुभ योग

शुभ योग का चयन क्यों जरूरी है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुभ योग में कार्य शुरू करने से ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा कार्य को समर्थन देती है। यदि आप गलत समय पर कोई कार्य शुरू करते हैं तो मेहनत के बावजूद असफलता मिल सकती है। शुभ योग में कार्य करने से न केवल सफलता की संभावना बढ़ती है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास भी मिलता है। यह भी माना जाता है कि शुभ योग में किए गए कार्य दीर्घकालिक लाभ और स्थिरता प्रदान करते हैं।

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शुभ योग

शुभ योग की गणना कैसे करें?

शुभ योग की गणना पंचांग के आधार पर की जाती है। पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी दी जाती है। आप अपने स्थानीय पंडित या ज्योतिषी से संपर्क करके किसी विशेष दिन का शुभ योग जान सकते हैं।

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