Shivling Abhishek: आज के समय में एक प्रश्न अक्सर उठता है कि क्या दूध को शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए या नहीं ।
Shivling Abhishek: आज के समय में एक प्रश्न अक्सर उठता है कि क्या दूध को शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए या नहीं। आपने अक्सर शिव मंदिर में पूजा के समय कई लोगों को भगवान शिव का दूध से अभिषेक करते हुए देखा होगा और आपके मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि ये दूध तो बर्बाद हो रहा है इसे किसी जरूरत मंद को दे देना चाहिए आपको बता दें शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है।कई लोगों के मन में यह जिज्ञासा जरूर आती होगी कि आखिर इस प्रथा के पीछे क्या रहस्य छिपा है। क्या यह केवल एक धार्मिक परंपरा है, या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक अर्थ भी है? अगर आपके मन में भी कभी यह सवाल उठा है, तो इसका उत्तर जानने के लिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें
भगवान शिव का अभिषेक कैसे किया जाता है
शिवलिंग भगवान शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। शिव पुराण, लिंग पुराण और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों में शिवलिंग अभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। अभिषेक का अर्थ है पवित्र द्रवों से भगवान शिव का स्नान कराना। इसमें जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का प्रयोग किया जाता है, जिसे पंचामृत कहा जाता है।शिव पुराण में कहा गया है कि श्रद्धा और भक्ति से किया गया अभिषेक भक्त के मन को शुद्ध करता है और उसे शिव कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से दूध को शांति, पवित्रता और सात्त्विकता का प्रतीक माना गया है।
भगवान शिव को क्यों चढ़ाया जाता है दूध
शास्त्रों में दूध चढ़ाने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। शिव पुराण के अनुसार दूध से अभिषेक करने से मनुष्य को मानसिक शांति और सौम्यता प्राप्त होती है। दूध का श्वेत रंग पवित्रता, सरलता और निष्कपट भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा आयुर्वेदिक और प्रतीकात्मक दृष्टि से भी दूध शीतलता प्रदान करता है। जैसा कि आप सब जानते हैं कि भगवान शिव को महादेव और भोलेनाथ कहा जाता है जिन्होंने सारे संसार का ताप और विष धारण किया था आपको बता दें कि जब समुद्र मंथन जब हलाहल विष निकला था तब भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया और नीलकंठ कहलाए। आपको बता दें विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें दूध अर्पित किया था, तभी से शिवलिंग का दूध से अभिषेक करने की परंपरा है
भगवान शिव को दूध चढ़ाना जरूरी है?
कई लोग मानते हैं कि शिवलिंग पर केवल दूध ही चढ़ाना चाहिए जबकि शास्त्र ऐसा नहीं कहते। शास्त्रों में जल को सबसे सरल और सर्वोत्तम अर्पण माना गया है। यदि किसी के पास दूध उपलब्ध न हो तो केवल जल से भी शिवलिंग का अभिषेक किया जा सकता है।
शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का तरीका
भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस बात का खास ख्याल रखें कि भगवान शिव को चढ़ाया गया दूध बर्बाद न हो; सबसे अच्छा तरीका यह है कि दूध को बर्तन समेत चढ़ाया जाए ताकि दूसरे लोग भी उसका इस्तेमाल कर सकें।
शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के लिए चांदी के बर्तन का इस्तेमाल करना चाहिए; लेकिन अगर चांदी का लोटा न हो, तो मिट्टी के बर्तन से भी महादेव को जल चढ़ाया जा सकता है।
जलाभिषेक के लिए सोने, चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन का इस्तेमाल करना चाहिए। स्टील, एल्युमीनियम या लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि पूजा-पाठ में इन धातुओं को शुभ नहीं माना जाता है।
बर्तन में दूध या जल भरें और उसे शिवलिंग पर धीरे-धीरे और पतली धार में चढ़ाएं। इस दौरान लगातार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। आप नीचे दिए गए खास मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं।
दूध चढ़ाने के लिए शिव मंत्र
नमः शंभवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।
ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिर्ब्रम्हणोधपतिर्ब्रम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।
तत्पुरषाय विद्म्हे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।।
यह भी पढ़ें
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)