Shardiya Navratri 2026 : हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले इस त्योहार के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
Shardiya Navratri 2026 : हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले इस त्योहार के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि में देवी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और भक्तों पर माता रानी की कृपा बनी रहती है। नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत, पूजा, मंत्रों का जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना का विधान है। आइए, घटस्थापना की तारीखों और शुभ समय के बारे में जानते हैं...
शारदीय नवरात्रि कब शुरू होती है?
पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर को रात लगभग 9:18 बजे शुरू होगी और 11 अक्टूबर को रात 9:31 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के आधार पर, नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसके बाद, अगले नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाएगी।
घटस्थापना के लिए शुभ समय
पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक है। इस अनुष्ठान के लिए लगभग 3 घंटे 52 मिनट का समय मिलता है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे के बीच होता है।
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शारदीय नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
हिंदू धर्म में मान्यता है कि देवी दुर्गा ने संसार के कल्याण के लिए इन नौ दिनों में राक्षस महिषासुर से युद्ध किया था। नौवें दिन, माता रानी ने महिषासुर का वध किया और संसार की रक्षा की; इसीलिए देवी दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना होती है, जिसके बाद नौ दिनों तक सुबह-शाम पूजा, आरती और देवी को भोग चढ़ाया जाता है। जिस दिन नवरात्रि का व्रत पूरा होता है , उस दिन दशहरा मनाया जाता है।
शारदीय नवरात्रि पूजा की विधि
नवरात्रि के पहले दिन, अपने घर में माता की चौकी स्थापित करने के लिए एक पवित्र जगह चुनें।
गंगाजल का उपयोग करके उस जगह को शुद्ध करें।
शुभ समय पर घटस्थापना की रस्म पूरी करें।
कलश के पास या उसके ऊपर देवी दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर रखें।
एक अखंड ज्योति जलाएं जो नवरात्रि के नौ दिनों तक जलती रहे; इस अखंड ज्योति को जलाना आपकी इच्छा पर निर्भर करता है।
देवी को चुनरी चढ़ाएं।
फूल, कपूर, अगरबत्ती और दीपक का उपयोग करके पंचोपचार पूजा करें यह पाँच चीज़ें अर्पित करने की एक रस्म है।
नौ दिनों तक पूरी विधि-विधान से देवी दुर्गा की पूजा करें और उनके मंत्रों का जाप करें।
दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और देवी कवच का पाठ करें।
सुबह और शाम देवी की आरती करें और भोग चढ़ाएं।
शारदीय नवरात्रि का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध किया था और देवताओं व दुनिया को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसलिए, नवरात्रि को अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। नौ दिनों तक देवी माँ के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है और दसवें दिन को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के इन नौ दिनों में देवी माँ पृथ्वी पर निवास करती हैं। ये पवित्र दिन मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह भी पढ़ें-
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।