Shani Jayanti Upay: शनि जयंती कल है। अगर आप उज्जैन में हैं तो वहां के पांच प्राचीन शनि मंदिरों में पूजा-अर्चना जरूर करें। इससे आपके जीवन में न्याय के देवता की अपार कृपा होगी।
Shani Jayanti Upay: शनि जयंती कल है। अगर आप उज्जैन में हैं तो वहां के पांच प्राचीन शनि मंदिरों में पूजा-अर्चना जरूर करें। इससे आपके जीवन में न्याय के देवता की अपार कृपा होगी। शनि आपको इस जन्म में साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों से मुक्त कर देंगे। जानिए महत्व।
शनि नवग्रह मंदिर
बता दें कि यदि आप उज्जैन में रहते हैं और शनि जयंती के दिन शनि देव का आशीर्वाद लेना चाहते हैं तो आप शनि नवग्रह मंदिर जा सकते हैं। इस मंदिर का इतिहास 2500 साल पुराना है। इस मंदिर की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने की थी। जैसे ही राजा पर शनि की साढ़ेसाती खत्म हुई तो शनि महाराज उनसे प्रसन्न हुए, उसके बाद राजा ने इस मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। शनि जयंती पर कल सुबह से ही यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ेगा।
सिंधी कॉलोनी चौराहे पर स्थित शनि मंदिर
भारत में शनि जयंती के अवसर पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। सिंधी कॉलोनी चौराहे से थोड़ी दूरी पर एक बहुत ही प्राचीन शनि मंदिर है। यहां शनिवार को भक्तों का मेला लगता है। यहां दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है।
सूर्य पुत्र शनिदेव के मंदिर
भगवान शनिदेव की जयंती पर हरसिद्धि चौराहा स्थित सूर्य पुत्र शनिदेव के मंदिर में हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही तेलाभिषेक और दर्शन के लिए उमड़ते हैं। इस पावन अवसर पर भगवान के मंदिर को सुंदर विद्युत सज्जा और फूलों से सजाया जाता है। हर बार भगवान शनिदेव की जयंती पर भगवान अलग-अलग रूपों में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। पिछली जयंती पर वे न्यायाधीश कमल पर विराजमान थे, इस बार वे सांवरिया सेठ के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे।
शनि महाराज की प्राचीन मूर्ति
चिंतामन रोड स्थित जंतर-मंतर (वेधशाला) के पास शनि महाराज की प्राचीन मूर्ति है। इस स्थान की खास बात यह है कि यहां महिलाएं भी पूजा कर सकती हैं। इसके पीछे एक प्राचीन मान्यता है। आमतौर पर कहा जाता है कि जहां भी भगवान शनिदेव की मूर्ति चट्टान के रूप में, भैंसे पर सवार या दंड के रूप में होती है, वहां महिलाओं का जाना वर्जित होता है।
लेकिन यहां विराजमान लक्ष्मी कुबेर के स्वरूप और युवा प्रसन्न मुद्रा के कारण महिलाएं लक्ष्मी कुबेर के रूप में उनकी पूजा करती हैं। ऐसा करने से उनके घर और आर्थिक स्थिति समृद्ध होती है। शनि जयंती पर यहां भीड़ देखने को मिलती है।