facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  sarva pitru amavasya 2026 kab hai sarva pitru amavasya janiye tithi aur shubh muhurt

Sarva Pitru Amavasya 2026: कब है सर्वपितृ अमावस्या, जानिए तिथि और मुहूर्त

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Sarva Pitru Amavasya 2026:  सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण और आखिरी दिन है; यह इस अवधि के समापन का प्रतीक है। यह अश्विन महीने में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को आती है और इसे अश्विन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

Sarva Pitru Amavasya 2026:

Sarva Pitru Amavasya 2026:  सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण और आखिरी दिन है यह इस अवधि के समापन का प्रतीक है। यह अश्विन महीने में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को आती है और इसे अश्विन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए तर्पण और श्राद्ध की रस्में निभाई जाती हैं जिनका निधन किसी भी महीने की अमावस्या तिथि को हुआ था। हालाँकि सर्व पितृ अमावस्या का महत्व इससे कहीं अधिक है; शास्त्रों के अनुसार इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु की सही तारीख ज्ञात नहीं है। आइए जानते हैं कि सर्व पितृ अमावस्या कब है और इस दिन तर्पण और श्राद्ध की रस्में निभाने के लिए कुतुप मुहूर्त क्या है।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 की तारीख

वैदिक कैलेंडर के अनुसार, अश्विन अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर को रात 9:35 बजे शुरू होती है और 10 अक्टूबर को रात 9:19 बजे तक रहती है। उदय तिथि और अमावस्या से जुड़े कुतुप मुहूर्त के आधार पर, सर्व पितृ अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर को है।

सर्व पितृ अमावस्या पर किन पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जाता है?

सर्व पितृ अमावस्या पर, उन पूर्वजों के लिए तर्पण श्राद्ध, पिंड दान, दान और पंचबली कर्म जैसी रस्में निभाई जाती हैं जिनका निधन अमावस्या तिथि को हुआ था।
जिन लोगों के पूर्वजों का निधन पूर्णिमा  को हुआ था वे भी सर्व पितृ अमावस्या पर उनके लिए तर्पण कर सकते हैं।जो लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु की सही तारीख नहीं जानते हैं, वे भी इस दिन श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। कहा जाता है कि सर्व पितृ अमावस्या, पितृ पक्ष का वह दिन है जब सभी पूर्वजों चाहे वे ज्ञात हों या अज्ञात के लिए तर्पण और श्राद्ध की रस्में निभाई जा सकती हैं।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 पर तर्पण और श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त

पितृ पक्ष के दौरान, पूर्वजों के लिए तर्पण और श्राद्ध जैसी रस्में खास तौर पर कुतुप मुहूर्त में की जाती हैं। सर्व पितृ अमावस्या पर कुतुप मुहूर्त 47 मिनट का होता है, जो सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक चलता है। जो लोग कुतुप मुहूर्त के दौरान तर्पण, दान या श्राद्ध की रस्में नहीं कर पाते वे रोहिण मुहूर्त में ऐसा कर सकते हैं। सर्व पितृ अमावस्या पर रोहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 बजे से 1:18 बजे के बीच होता है और यह भी 47 मिनट का होता है। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान तर्पण और श्राद्ध के लिए सबसे शुभ समय सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे के बीच है। इसके अलावा सर्व पितृ अमावस्या पर अपराह्न काल दोपहर 1:18 बजे से 3:37 बजे तक होता है जिसकी अवधि 2 घंटे 20 मिनट है।

सर्व पितृ अमावस्या का महत्व

सर्व पितृ अमावस्या को महालया अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए तर्पण किया जाता है जिनकी श्राद्ध की विशिष्ट तिथियां ज्ञात नहीं हैं। व्यक्ति को पूरी श्रद्धा के साथ उनके नाम पर तर्पण करना चाहिए। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना, दान-पुण्य करना और गायों, चींटियों, कुत्तों व कौवों को भोजन खिलाना भी एक परंपरा है। माना जाता है कि पूर्वजों को भोजन कराने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद बना रहता है। अगर किसी की कुंडली में 'पितृ दोष' हो, तो इस दिन पूर्वजों के लिए 'तर्पण' और दान-पुण्य करना बहुत फायदेमंद होता है। धर्म-ग्रंथों में इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी खास महत्व बताया गया है अगर हो सके तो पवित्र स्नान के लिए घर के पास की किसी पवित्र नदी पर जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें 

Pitrupaksha: कितने प्रकार के होते हैं तर्पण, जानिए महत्व

Pitru Paksha 2026: श्राद्ध के दिन भूलकर भी न छोड़ें ये जरूरी चीजें, जानें सामग्री का धार्मिक महत्व

Pind Daan: एक ऐसा मंदिर जहां जीते-जी अपना पिंडदान करते हैं लोग 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel