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Kalashtami: कालाष्टमी के दिन इन 5 मंत्रों का करें जाप, जीवन में नहीं आएंगी मुश्किलें!

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Mantra Jaap Niyam: कालाष्टमी केवल मंत्र जाप का अवसर नहीं, बल्कि भगवान शिव के काल भैरव स्वरूप का स्मरण करने का विशेष दिन भी है। 
 

Kalashtami
Kalashtami Puja Vidhi: सनातन धर्म में कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। भगवान काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायता मिलती है। कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।

कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान काल भैरव का ध्यान करें। शाम के समय पूजा करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक जलाकर भगवान को पुष्प अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार काल भैरव के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंत्र जाप से मन को एकाग्र करने, भय को कम करने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने में सहायता मिलती है।

पहला मंत्र- ॐ कालभैरवाय नमः

कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव के इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है। “ॐ कालभैरवाय नमः” का जाप श्रद्धापूर्वक करने से साधक भगवान काल भैरव का स्मरण करता है। इस मंत्र का जाप आप 108 बार कर सकते हैं। नियमित रूप से मंत्र जाप करने से मन में आत्मविश्वास और सकारात्मकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

दूसरा मंत्र- ॐ भैरवाय नमः

भगवान काल भैरव को समर्पित यह सरल मंत्र भी कालाष्टमी के दिन जाप के लिए शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान शांत मन से “ॐ भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें। धार्मिक मान्यता है कि भगवान भैरव का स्मरण करने से व्यक्ति को भय और चिंता से उबरने की शक्ति मिलती है।

तीसरा मंत्र- ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं

बटुक भैरव भगवान शिव के भैरव स्वरूपों में से एक माने जाते हैं। यह मंत्र विशेष रूप से संकट और बाधाओं से मुक्ति की कामना के लिए किया जाता है। कालाष्टमी के दिन श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखें और भगवान भैरव का ध्यान करें।

चौथा मंत्र- ॐ क्लीं कालभैरवाय नमः

यह मंत्र भगवान काल भैरव को समर्पित है। कालाष्टमी के दिन इसका जाप करते समय मन में किसी प्रकार का भय या नकारात्मक विचार न रखें। श्रद्धा के साथ मंत्र का जाप करें और भगवान से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता की प्रार्थना करें।

पांचवां मंत्र- ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्

धार्मिक मान्यताओं में इस मंत्र को भगवान काल भैरव की उपासना से जुड़ा प्रभावशाली मंत्र माना जाता है। इसका जाप करते समय विशेष रूप से शुद्धता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी मंत्र के उच्चारण को लेकर संदेह हो तो किसी योग्य गुरु या आचार्य से सही उच्चारण सीखना बेहतर माना जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा करते समय मन, वचन और कर्म की शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना, काले कुत्ते को भोजन देना और गरीबों की सहायता करना भी धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। पूजा के दौरान भगवान काल भैरव से अपने और परिवार के लिए सुख-शांति की प्रार्थना करें।

श्रद्धा से करें काल भैरव का स्मरण

कालाष्टमी केवल मंत्र जाप का अवसर नहीं, बल्कि भगवान शिव के काल भैरव स्वरूप का स्मरण करने का विशेष दिन भी है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ की गई पूजा मन को शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करती है। इसलिए इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा करें, मंत्रों का जाप करें और भगवान काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करें।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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