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Swami Kailashanand Giri Ji: 27 घंटे साधना कर बनाया नया रिकॉर्ड, पीड़ा में भी की भस्म आरती... शिवमय हुए भक्त

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shiv Sadhana: साधना के दौरान भस्म आरती का दृश्य भी श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक करने वाला रहा। शारीरिक पीड़ा के बावजूद पूज्य गुरुदेव ने भस्म आरती में हिस्सा लिया। 

Swami Kailashanand Giri Ji Maharaj
Bhasma Aarti: हरिद्वार स्थित दक्षिण काली मंदिर इन दिनों आस्था, साधना और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ रही है। इस आध्यात्मिक वातावरण के बीच निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की कठोर साधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है। उनकी साधना को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंच रहे हैं और उन्हें साधना में लीन देखकर भावुक हो रहे हैं।

पूज्य गुरुदेव ने लगातार 27 घंटे तक साधना कर नया रिकॉर्ड बनाया है। साधना के दौरान उनके पैरों में काफी पीड़ा रही और लंबे समय तक खड़े रहने में भी उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनके संकल्प में कोई कमी नहीं आई। शरीर पीड़ा से गुजरता रहा, लेकिन साधना निरंतर चलती रही। यही अटूट संकल्प श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया है।

25 दिनों की कठोर साधना

पिछले 25 दिनों से चल रही इस कठिन साधना के दौरान गुरुदेव ने कई बार 20 से 27 घंटे तक एक ही आसन पर बैठकर साधना की। इतनी लंबी साधना के बाद भी उनकी भक्ति और आस्था में कोई कमी दिखाई नहीं दी। साधना के बीच उनका ध्यान पूरी तरह भगवान शिव में लगा रहा। भक्तों का कहना है कि उन्हें इस अवस्था में देखकर ऐसा अनुभव होता है, जैसे पूरा वातावरण शिवमय हो गया हो।

पीड़ा में भी की भस्म आरती

साधना के दौरान भस्म आरती का दृश्य भी श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक करने वाला रहा। शारीरिक पीड़ा के बावजूद पूज्य गुरुदेव ने भस्म आरती में हिस्सा लिया। उनके मुख से लगातार “महादेव… महादेव…” का जाप सुनाई देता रहा। इस दृश्य ने वहां मौजूद अनेक श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। कई भक्तों की आंखों में आंसू आ गए और पूरा मंदिर परिसर भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया।

संतों की भावुक मुलाकात

आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज ने भी गुरुदेव की साधना को देखकर उनके भीतर शिव तत्व दिखाई देने की बात कही। दोनों संतों की भावुक मुलाकात ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को भी भाव-विभोर कर दिया। इस मुलाकात ने साधना और संत परंपरा के प्रति लोगों की आस्था को और गहरा किया।

साधना का संदेश

स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की यह साधना केवल कठिन तपस्या का दृश्य नहीं, बल्कि संकल्प, त्याग और भक्ति की भावना को भी सामने रखती है। शरीर की पीड़ा के बावजूद साधना के प्रति उनका अडिग विश्वास श्रद्धालुओं को आत्मिक शक्ति और भक्ति का संदेश देता है। दक्षिण काली मंदिर में आज यह साधना श्रद्धा का बड़ा केंद्र बन चुकी है। एक बार इस अलौकिक साधना के दृश्य को जरूर देखिए। शब्दों में इस अनुभव को पूरी तरह व्यक्त करना कठिन है। पूज्य गुरुदेव के दर्शन कर उनकी साधना और भक्ति को स्वयं महसूस किया जा सकता है। उनके मुख से निकलता “महादेव… महादेव…” और साधना में लीन उनका स्वरूप श्रद्धालुओं के मन में गहरी आध्यात्मिक अनुभूति छोड़ रहा है।

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