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Rajan Ji Maharaj: घर-परिवार में सुख के लिए बोलने का तरीका बदलो, राजन जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Positive Thinking: जीवन बहुत छोटा और परिवर्तनशील है। समय किसी व्यक्ति के लिए हमेशा नहीं रुकता। इसलिए जब हमारे अपने लोग हमारे साथ हैं, तब उनके साथ प्रेम से बोलना और सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।
 

Rajan Ji Maharaj
Life Lessons: घर-परिवार में सुख और शांति बनाए रखने के लिए हमारी वाणी का बहुत बड़ा महत्व है। राजन जी महाराज समझाते हैं कि मनुष्य को हमेशा सत्य बोलना चाहिए, क्योंकि सत्य जीवन का आधार है। लेकिन सत्य बोलने का अर्थ यह नहीं है कि हम हर बात को कठोर शब्दों में कहें। कई बार हमारी बात सही होती है, लेकिन उसे कहने का तरीका सामने वाले के मन को दुखी कर देता है। इसलिए सत्य के साथ मधुरता और संवेदनशीलता भी जरूरी है।

सत्य बोलना हमारा धर्म है, लेकिन हर सत्य को हर समय बोलना आवश्यक नहीं होता। यदि कोई बात बहुत कड़वी है और उसे कहने से किसी का मन टूट सकता है, रिश्ते में तनाव पैदा हो सकता है या घर की शांति भंग हो सकती है, तो ऐसी स्थिति में मौन रहना अधिक उचित हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि हम झूठ बोलें, बल्कि यह है कि सही समय और सही शब्दों का चुनाव करें।

कड़वा बोलना नहीं है सत्य 

कुछ लोग अपनी कठोर वाणी को यह कहकर उचित ठहराते हैं कि वे तो केवल सत्य बोलते हैं। लेकिन सत्य बोलने के नाम पर किसी को अपमानित करना या बार-बार कड़वी बातें कहना उचित नहीं है। सच को भी प्रेम और सम्मान के साथ कहा जा सकता है। हमारी बात यदि सही है, फिर भी उसके कारण सामने वाले का दिल दुख रहा है, तो हमें अपने बोलने के तरीके पर विचार करना चाहिए।

रिश्तों को जोड़ती है मीठी वाणी 

घर में पति-पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन और बच्चों के बीच छोटी-छोटी बातें भी बड़ा रूप ले लेती हैं। यदि हर व्यक्ति एक-दूसरे से प्रेमपूर्वक और मधुर भाषा में बात करे, तो घर का वातावरण अपने आप शांत और सुखद हो जाता है। मीठे शब्द किसी समस्या को तुरंत समाप्त न करें, लेकिन वे समस्या को बढ़ने से जरूर रोक सकते हैं।

किसी के लिए नहीं रुकता समय 

जीवन बहुत छोटा और परिवर्तनशील है। समय किसी व्यक्ति के लिए हमेशा नहीं रुकता। इसलिए जब हमारे अपने लोग हमारे साथ हैं, तब उनके साथ प्रेम से बोलना और सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। बाद में पछताने से अच्छा है कि आज ही अपनी वाणी को मधुर बना लिया जाए।

वाणी में सत्य के साथ रखें प्रेम 

सच्ची समझदारी यही है कि हम सत्य को छिपाएं नहीं, लेकिन उसे कठोरता से भी न कहें। जहाँ आवश्यक हो वहां प्रेम से समझाएं और जहां शब्द किसी का दिल दुखाने वाले हों, वहाँ कुछ समय के लिए मौन रहना सीखें। यदि घर का हर सदस्य अपनी वाणी पर थोड़ा नियंत्रण रखे और सत्य के साथ मिठास जोड़ दे, तो घर में कलह कम होगी, प्रेम बढ़ेगा और परिवार का वातावरण सुख-शांति से भर जाएगा।

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