facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  swami chinmayananda bapu explained what is the secret of the human body in this world

Swami Chinmayanand Bapu: संसार में मनुष्य देह का क्या है रहस्य? स्वामी चिन्मयानंद बापू ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Spiritual Knowledge: यदि मनुष्य बार-बार जन्म लेता रहे और उसके विचार, कर्म और जीवन की दिशा में कोई परिवर्तन न आए, तो उसका जीवन अधूरा ही रह जाता है। 
 

Swami Chinmayananda Bapu
Human Life Mystery: संतों ने हमेशा से मानव जीवन को अत्यंत दुर्लभ और अनमोल बताया है। स्वामी चिन्मयानंद बापू कहते हैं कि मनुष्य का शरीर हमें बड़ी मुश्किल से प्राप्त होता है। संसार में अनेक जीव-जंतु हैं, लेकिन मनुष्य को ही विवेक, विचार और सही-गलत को समझने की विशेष क्षमता मिली है। इसलिए मानव शरीर केवल भौतिक सुख पाने का साधन नहीं, बल्कि जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने का अवसर भी है।

संसार में मनुष्य का जन्म मिल जाना ही पर्याप्त नहीं है। इस शरीर का स्वस्थ रहना और लंबे समय तक जीवन प्राप्त होना भी अपने आप में बड़ी बात है। शरीर को रोगों का घर बनने में देर नहीं लगती। कभी कोई बीमारी, कभी कोई परेशानी और कभी कोई शारीरिक कमजोरी जीवन को प्रभावित करती रहती है। इसलिए यदि परमात्मा ने हमें स्वस्थ शरीर और लंबा जीवन दिया है, तो हमें इसके महत्व को समझना चाहिए।

जीवन का सदुपयोग करना जरूरी

स्वामी चिन्मयानंद बापू बताते हैं कि लंबा जीवन मिलना तभी सार्थक है, जब हम उसका सही उपयोग करें। केवल धन कमाने, भौतिक सुख जुटाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने में पूरा जीवन लगा देना मानव जन्म का उद्देश्य नहीं हो सकता। हमें यह विचार करना चाहिए कि हमें जो समय और शरीर मिला है, उसका उपयोग हम किस दिशा में कर रहे हैं।

संतों का साथ मिलना भी दुर्लभ

मानव जीवन में किसी अच्छे संत और सद्गुरु का साथ मिल जाना भी बहुत बड़ी कृपा मानी गई है। संतों का सानिध्य व्यक्ति को जीवन का सही मार्ग दिखाता है। उनके विचारों और उपदेशों से मनुष्य अपने भीतर झांकना सीखता है और समझ पाता है कि जीवन केवल संसार की भागदौड़ तक सीमित नहीं है।

भगवान के चरणों में अनुराग सबसे बड़ी कृपा

संतों के अनुसार, मन का भगवान के चरणों में लग जाना सबसे दुर्लभ सौभाग्य है। जब मनुष्य के भीतर भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम जागता है, तब उसका जीवन वास्तविक अर्थ में बदलने लगता है। संसार में रहते हुए भी वह अपने कर्मों को अधिक शुद्ध भाव से करने लगता है और जीवन के प्रति उसकी दृष्टि बदल जाती है।

बार-बार जन्म-मृत्यु से मुक्ति का मार्ग

यदि मनुष्य बार-बार जन्म लेता रहे और उसके विचार, कर्म और जीवन की दिशा में कोई परिवर्तन न आए, तो उसका जीवन अधूरा ही रह जाता है। इसलिए मानव शरीर को केवल सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, सद्कर्म, भक्ति और ईश्वर की प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए मिला अवसर समझना चाहिए। यही मानव जीवन की सबसे बड़ी सार्थकता है।

ये भी पढ़ें -  गणेश जी को क्यों चढ़ाया जाता है सिंदूर? जानें इसकी वजह और धार्मिक महत्व

स्वामी चिन्मयानंद बापू
जानिए गुरूजी के बारे मेंस्वामी चिन्मयानंद बापू

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel