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Lord Ganesha: गणेश जी को क्यों चढ़ाया जाता है सिंदूर? जानें इसकी वजह और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Lord Ganesha: पुराणों में भगवान गणेश के सिन्दूरासुर से युद्ध और उसके वध की कथा का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार सिन्दूर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था।

Lord Ganesha
Lord Ganesha: भगवान गणेश की पूजा में सिंदूर का विशेष स्थान माना गया है। गणपति की प्रतिमा पर दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करने के साथ सिंदूर का लेप भी किया जाता है। कई जगहों पर गणेश जी की प्रतिमा को सिंदूरी रंग में ही सजाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में सिंदूर को भगवान गणेश का प्रिय माना गया है, लेकिन गणपति को सिंदूर चढ़ाने की यह परंपरा कब और कैसे शुरू हुई, इसके पीछे क्या पौराणिक कथा है? इसका संबंध भगवान गणेश के एक ऐसे रूप से बताया जाता है, जिसमें उन्होंने सिंदूरासुर नामक दैत्य का वध किया था। आइए जानते हैं गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यता...

सिंदूरासुर और गणेश जी का कथा

पुराणों में भगवान गणेश के सिन्दूरासुर से युद्ध और उसके वध की कथा का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार सिन्दूर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था। उसे अपनी शक्ति पर बहुत अधिक अभिमान था। वरदान प्राप्त करने के बाद उसका अत्याचार बढ़ता गया और उसने देवताओं, ऋषियों तथा पृथ्वी के लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया। उसके भय से देवता भी चिंतित हो उठे। सिन्दूरासुर इतना शक्तिशाली था कि वह तीनों लोकों में अपना प्रभाव बढ़ाने लगा। उसके अत्याचार से धर्म-कर्म में बाधा आने लगी। देवताओं ने भगवान गणेश की शरण ली और उनसे इस दैत्य के आतंक से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।

बाल रूप में प्रकट हुए भगवान गणेश

पौराणिक कथा के अनुसार, इसी समय भगवान गणेश ने गजानन रूप में अवतार लिया। गणेश पुराण में उनके इस अवतार से जुड़ी कथा में राजा वरेण्य और उनकी पत्नी पुष्पिका का भी वर्णन मिलता है। भगवान गणेश ने उन्हें पूर्वजन्म में दिए हुए वचन के अनुसार उनके घर पुत्र रूप में आने का आश्वासन दिया था। भगवान गणेश के प्राकट्य के बाद जब सिन्दूरासुर के अत्याचारों का पता चला, तब गजानन ने उसका अंत करने का संकल्प लिया। उस समय भगवान गणेश अभी बाल रूप में ही थे, लेकिन उनका तेज और सामर्थ्य असाधारण था।

 

Lord Ganesha

सिन्दूरासुर और गणेश जी के बीच हुआ युद्ध

जब सिन्दूरासुर को भगवान गणेश के बारे में पता चला तो वह उनसे युद्ध करने के लिए पहुंचा। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। सिन्दूरासुर को अपनी शक्ति और वरदान पर बहुत घमंड था, लेकिन भगवान गणेश के सामने उसकी एक नहीं चली। गणेश पुराण की कथा के अनुसार सिन्दूरासुर का वध किसी सामान्य शस्त्र से करना संभव नहीं था। इसलिए भगवान गणेश ने उसे अपने हाथों से मर्दित किया। उन्होंने अपने पराक्रम से उस असुर का अंत कर दिया। इस प्रकार सिन्दूरासुर के अत्याचार से देवताओं और ऋषियों को मुक्ति मिली।

सिन्दूरासुर के वध के बाद गणेश जी ने लगाया सिंदूर

सिन्दूरासुर का वध करने के बाद भगवान गणेश ने उसके शरीर से निकले लाल वर्ण के पदार्थ को अपने शरीर पर लगा लिया। इसी कारण उनका शरीर सिंदूर के समान लाल दिखाई देने लगा। गणेश पुराण में भगवान गणेश के इस रूप को सिंदूर से जुड़े विशेष स्वरूप के रूप में वर्णित किया गया है। इसी प्रसंग के कारण भगवान गणेश को सिंदूर प्रिय होने की मान्यता प्रचलित हुई।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी कथा की वजह से गणपति की पूजा में सिंदूर अर्पित किया जाने लगा। भक्त भगवान गणेश के मस्तक पर सिंदूर का तिलक लगाते हैं और कई स्थानों पर पूरी प्रतिमा पर सिंदूर का लेप भी किया जाता है। गणेश पुराण से जुड़े वर्णनों में भगवान गणेश के सिंदूरप्रिय और सिंदूरवदन स्वरूप का उल्लेख मिलता है। 

 

Lord Ganesha

गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने की दूसरी पौराणिक मान्यता

भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित करने से जुड़ी एक अन्य धार्मिक मान्यता शिव पुराण से भी जोड़ी जाती है। इस कथा का संबंध भगवान गणेश के गजमुख स्वरूप से है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता पार्वती के द्वार की रक्षा करते हुए भगवान गणेश का भगवान शिव से युद्ध हुआ, तब भगवान शिव ने क्रोध में उनका मस्तक अलग कर दिया। बाद में माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवित करने के लिए उनके धड़ पर हाथी का मस्तक स्थापित किया।

एक धार्मिक मान्यता के अनुसार हाथी के उस मस्तक पर पहले से सिंदूर का लेप था। जब माता पार्वती ने गणेश जी के मुख पर सिंदूर देखा तो उन्होंने कहा कि जिस सिंदूर से उनके पुत्र का मुख सुशोभित हुआ है, उसी सिंदूर से मनुष्य आगे उनकी पूजा करेंगे। इसी मान्यता को भी गणेश पूजा में सिंदूर चढ़ाने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

पूजा में सिंदूर का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में लाल सिंदूर को मंगल और शुभता से जुड़ा माना गया है। भगवान गणेश स्वयं मंगलकारी और प्रथम पूज्य देवता माने जाते हैं। इसलिए गणपति पूजन में सिंदूर का विशेष महत्व बताया गया है। गणेश जी को सिंदूर अर्पित करते समय भक्त श्रद्धापूर्वक उनके मस्तक पर सिंदूर का तिलक लगाते हैं। कई मंदिरों में गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर का लेप करने की भी परंपरा है। दूर्वा और मोदक के साथ सिंदूर को भी गणेश जी के पूजन की प्रमुख सामग्री में माना जाता है।

इस प्रकार भगवान गणेश को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा केवल सामान्य पूजा-पद्धति का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गणेश पुराण में वर्णित सिन्दूरासुर वध की पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। सिन्दूरासुर का वध करने के बाद भगवान गणेश द्वारा लाल वर्ण के पदार्थ को अपने शरीर पर धारण करने की कथा के कारण ही उन्हें सिंदूरप्रिय माना गया और उनकी पूजा में सिंदूर अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। 


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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