Lakshmi Puja: महालक्ष्मी व्रत के अंतिम दिन पूजा के साथ छोटा सा हवन करने की परंपरा बताई गई है। हवन के बाद वैष्णव भक्तों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है।
Mahalakshmi Mantra: महालक्ष्मी व्रत को माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने वाला महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत लगातार 16 दिनों तक किया जाता है। स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज के अनुसार इस दौरान श्रद्धा और नियमपूर्वक माता लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। इस बार महालक्ष्मी व्रत 18 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा। 18 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर करीब 1 बजे से आरंभ हो रही है। इसी दिन संध्या के समय माता लक्ष्मी की स्थापना करके व्रत का संकल्प लिया जा सकता है।
व्रत के पहले दिन शाम के समय स्वच्छ स्थान पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। माता लक्ष्मी को कमल का आसन अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद शंख में जल लेकर माता का जलाभिषेक या प्रतीकात्मक स्नान कराया जा सकता है। पूजा के दौरान माता को वस्त्र, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धापूर्वक अर्पित करनी चाहिए। पूजा के बाद माता लक्ष्मी की आरती करना भी महत्वपूर्ण बताया गया है।
माता लक्ष्मी की करें पूजा और आरती
स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज के अनुसार इन 16 दिनों के दौरान नियमित रूप से माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। प्रतिदिन माता को भोग लगाएं और आरती करें। पूजा के समय मन को शांत रखते हुए माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए। केवल पूजा की सामग्री ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और सात्विक भाव को भी विशेष महत्व देना चाहिए।
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लक्ष्मी गायत्री मंत्र का करें जाप
महालक्ष्मी व्रत के दौरान प्रतिदिन लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जाप करने की बात भी कही गई है। साधक को कम से कम एक माला मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र है— “ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।” मान्यता है कि नियमित मंत्र जाप से साधक का मन पूजा में एकाग्र होता है और माता लक्ष्मी के प्रति भक्ति भाव बढ़ता है।
16वें दिन करें हवन और दान
महालक्ष्मी व्रत के अंतिम दिन पूजा के साथ छोटा सा हवन करने की परंपरा बताई गई है। हवन के बाद वैष्णव भक्तों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद स्वयं प्रसाद या भोजन ग्रहण किया जाता है। इस प्रकार पूजा, मंत्र जाप, हवन, सेवा और दान के साथ महालक्ष्मी व्रत का समापन किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इस व्रत से माता लक्ष्मी की कृपा और घर में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।