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Devkinandan Thakur Ji Maharaj: जीवन में बड़े भाई और छोटे भाई का कर्तव्य, देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Life Values: भाई-भाई का रिश्ता केवल खून का रिश्ता नहीं है, बल्कि इसमें त्याग, सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। जब बड़ा भाई छोटे को आगे बढ़ने में मदद करता है और छोटा भाई बड़े का सम्मान करता है, तब परिवार में प्रेम और एकता बनी रहती है।
 

Devkinandan Thakur Ji Maharaj
Family Responsibility in Life: देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज बताते हैं कि परिवार में बड़े भाई का स्थान बहुत महत्वपूर्ण होता है। बड़े भाई को केवल उम्र में बड़ा होने का अधिकार नहीं मिलता, बल्कि उसके साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। बड़े भाई का कर्तव्य है कि वह अपने छोटे भाई-बहनों की उसी तरह देखभाल करे, जैसे वह अपने बच्चों की करता है। खासकर तब तक, जब तक छोटे भाई अपने पैरों पर खड़े न हो जाएं और अपने जीवन की जिम्मेदारियां खुद उठाने में सक्षम न हो जाएं।

बड़े भाई को अपने छोटे भाई की जरूरतों, शिक्षा और भविष्य की चिंता करनी चाहिए। परिवार में यदि माता-पिता के बाद किसी की जिम्मेदारी आती है, तो बड़े भाई का दायित्व और भी बढ़ जाता है। उसका व्यवहार छोटे भाई के प्रति सहयोग और संरक्षण वाला होना चाहिए।

छोटे भाई का बड़े भाई के प्रति सम्मान

ठाकुर जी महाराज के अनुसार, जिस प्रकार संतान अपने पिता का सम्मान करती है, उसी प्रकार छोटे भाई को भी अपने बड़े भाई का सम्मान करना चाहिए। बड़े भाई के प्रति आदर केवल उम्र की वजह से नहीं, बल्कि उसके परिवार के प्रति किए गए त्याग और जिम्मेदारियों को समझते हुए होना चाहिए। जब तक पिता जीवित हैं, तब तक पिता का सम्मान सर्वोपरि है। लेकिन पिता के न रहने पर बड़े भाई को पिता के समान मान-सम्मान देना छोटे भाई का महत्वपूर्ण कर्तव्य माना गया है। इससे परिवार में अनुशासन, प्रेम और आपसी विश्वास बना रहता है।

भाई-भाई का रिश्ता क्यों है जरूरी?

ठाकुर जी महाराज भाई-भाई के रिश्ते को परिवार की मजबूती से जोड़ते हैं। उनका संदेश है कि परिवार में हर व्यक्ति एक-दूसरे का सहारा बने। यदि बड़े भाई ने छोटे भाई को संभाला है तो छोटे भाई को भी बड़े भाई के प्रति कृतज्ञता और सम्मान रखना चाहिए। उन्होंने एक पुत्र वाले परिवार का उदाहरण देते हुए समझाया कि भगवान ने मनुष्य को दो आंखें, दो हाथ और दो पैर दिए हैं। इसका भाव यह है कि जीवन में सहारा और सहयोग की आवश्यकता होती है। परिवार में भाई-बहन भी एक-दूसरे के लिए इसी सहारे का काम करते हैं।

प्रेम और जिम्मेदारी से मजबूत होता है परिवार

भाई-भाई का रिश्ता केवल खून का रिश्ता नहीं है, बल्कि इसमें त्याग, सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। जब बड़ा भाई छोटे को आगे बढ़ने में मदद करता है और छोटा भाई बड़े का सम्मान करता है, तब परिवार में प्रेम और एकता बनी रहती है। यही आपसी सहयोग परिवार को कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती से खड़ा रखता है।

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श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
जानिए गुरूजी के बारे मेंश्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज

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