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Sanjeev Krishna Thakur Ji: भगवान श्रीकृष्ण को किसने दिया 'छलिया' नाम? संजीव कृष्ण ठाकुर जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shri Krishna Story: भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही गहरा भी है। वह कभी बाल रूप में माखन चुराते हुए दिखाई देते हैं, तो कभी अर्जुन को गीता का ज्ञान देने वाले योगेश्वर के रूप में सामने आते हैं।

Sanjeev Krishna Thakur Ji Maharaj
Hindu Religious Story: भगवान श्रीकृष्ण, गोपाल, कोई मुरलीधर, तो कोई गिरधर गोपाल के नाम से पुकारता है। भगवान के हर नाम के पीछे उनके जीवन और लीलाओं से जुड़ा कोई न कोई भाव छिपा हुआ है। संजीव कृष्ण ठाकुर जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के ऐसे ही एक नाम ‘छलिया’ का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि यह नाम केवल भक्तों ने ही नहीं दिया, बल्कि दुर्योधन ने भी भगवान श्रीकृष्ण को इसी भाव से संबोधित किया था।

दुर्योधन ने भगवान को दिया ‘छलिया’ नाम

कथा के अनुसार, दुर्योधन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि हे केशव! पूरी दुनिया आपको अनेक नामों से पुकारती है और भक्त आपको अलग-अलग नाम देकर आपका स्मरण करते हैं। लेकिन मैं भी आपको एक नाम देना चाहता हूं। भगवान श्रीकृष्ण ने जब यह सुना तो उन्होंने दुर्योधन से कहा कि आज तुम्हारी बुद्धि कैसे सुधर गई? दुर्योधन ने कहा कि पहले आप मेरा नाम सुन तो लीजिए। मैं आपको ऐसा नाम दूंगा, जो शायद किसी ने आपको पहले नहीं दिया होगा। इसके बाद दुर्योधन ने भगवान श्रीकृष्ण को ‘छलिया’ कहकर संबोधित किया।

श्रीकृष्ण को समझ नहीं पाया दुर्योधन 

दुर्योधन का कहना था कि उसने अपने जीवन में बहुत से लोगों को समझा और उनकी सोच को जानने का प्रयास किया। वह लोगों के व्यवहार और उनके स्वभाव को पढ़ने का दावा करता था। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के सामने उसकी सारी समझ अधूरी पड़ गई। दुर्योधन ने भगवान से कहा कि कृष्ण, मैं तुम्हें समझ ही नहीं पाया। तुम वास्तव में क्या हो, कहां खड़े हो, क्या सोच रहे हो और अगले क्षण क्या करने वाले हो, इसका किसी को पता नहीं चलता। तुम्हारी लीला और तुम्हारी योजना को समझ पाना आसान नहीं है।

श्रीकृष्ण की लीला को समझना है कठिन

भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही गहरा भी है। वह कभी बाल रूप में माखन चुराते हुए दिखाई देते हैं, तो कभी अर्जुन को गीता का ज्ञान देने वाले योगेश्वर के रूप में सामने आते हैं। कभी वह अपने भक्तों के साथ प्रेम करते हैं, तो कभी धर्म की स्थापना के लिए ऐसी रणनीति अपनाते हैं जिसे सामान्य बुद्धि से समझना कठिन हो सकता है। इसी भाव को संजीव कृष्ण ठाकुर जी महाराज ने ‘छलिया’ नाम के प्रसंग के माध्यम से समझाया। यहां ‘छलिया’ शब्द को केवल छल या धोखे के अर्थ में देखना पर्याप्त नहीं है। श्रीकृष्ण की लीलाएं इतनी रहस्यमयी हैं कि बड़े-बड़े ज्ञानी भी उनके वास्तविक स्वरूप और उनकी अगली लीला को पूरी तरह समझ नहीं पाते।

भगवान की लीला है अनंत 

श्रीकृष्ण के जीवन का संदेश यही है कि परमात्मा की लीला मानव बुद्धि की सीमाओं से कहीं आगे है। मनुष्य अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर बहुत कुछ समझ सकता है, लेकिन भगवान के प्रत्येक कार्य के पीछे छिपे उद्देश्य को समझ पाना आसान नहीं है। यही कारण है कि श्रीकृष्ण को जानने के लिए केवल बुद्धि नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति की भी आवश्यकता होती है। दुर्योधन का यह प्रसंग इसी बात की ओर संकेत करता है कि भगवान श्रीकृष्ण को समझने का प्रयास करने वाले व्यक्ति को अंततः उनकी लीला की विशालता के सामने अपनी सीमाओं का एहसास होता है।

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