Janmashtami Mystery: जन्माष्टमी केवल उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपने विश्वास और समर्पण को मजबूत करने का अवसर भी है।
Krishna Birth Celebration: इस वर्ष की कृष्ण जन्माष्टमी को सामान्य पर्व समझकर नहीं मनाना चाहिए, क्योंकि इस बार जन्माष्टमी के अवसर पर एक विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग विशेष महत्व रखता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए जब जन्माष्टमी पर इन दोनों का संयोग बनता है, तो भक्तों के लिए यह अवसर और भी विशेष माना जाता है।
शिवम साधक जी महाराज कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव रात के ठीक बारह बजे विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाना चाहिए। मान्यता है कि इसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर अवतार लेकर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का संदेश दिया था। इसलिए मध्यरात्रि में भगवान के प्राकट्य उत्सव को पूरे विधि-विधान और भाव के साथ मनाने से भक्त के मन में भक्ति और सकारात्मकता का भाव बढ़ता है।
खीरे से भगवान का प्राकट्य
जन्माष्टमी की पूजा में खीरे का भी विशेष महत्व बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय कारागार में देवकी और वसुदेव के बंधन खुलने की कथा से इसे जोड़कर देखा जाता है। परंपरा के अनुसार, मध्यरात्रि में खीरे से भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य कराया जाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से भगवान के जन्म और बंधनों से मुक्ति का संदेश देता है।
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108 बार करें मंत्र का जाप
जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। शिवम साधक जी महाराज ने बताया कि भक्त कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करते हुए भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं। पंचामृत से अभिषेक करते समय मन को शांत रखते हुए भगवान के प्रति पूरी श्रद्धा और समर्पण का भाव रखना चाहिए।
मनोकामना पूर्ति के लिए रखें सच्ची श्रद्धा
जन्माष्टमी केवल उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपने विश्वास और समर्पण को मजबूत करने का अवसर भी है। इस दिन यदि भक्त पूरे मन से भगवान का नाम जपता है, पूजा करता है और अपनी मनोकामना उनके चरणों में अर्पित करता है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इसलिए इस जन्माष्टमी को विशेष मानकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें, मंत्र जाप करें और उनके प्राकट्य उत्सव को श्रद्धापूर्वक मनाएं। सच्ची भक्ति और विश्वास के साथ की गई प्रार्थना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति का माध्यम बन सकती है।