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Devi Neha Saraswat: भगवान को कैसे बनाएं अपना आधार? देवी नेहा सारस्वत ने बताया सही रास्ता और महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Divine Support: जब हम भगवान को अपना आधार बना लेते हैं, तो जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी हमारा मन मजबूत रहता है। हमें विश्वास रहता है कि जो हो रहा है, उसमें भी भगवान की कोई न कोई इच्छा और सीख छिपी है। 
 

Devi Neha Saraswat
Devotional Motivation: देवी नेहा सारस्वत ने भगवान के साथ हमारे रिश्ते को लेकर एक बहुत ही सुंदर और गहरी बात कही है। अक्सर हम मंदिर जाते हैं तो हमारे मन में इच्छाओं और मांगों की एक लंबी सूची होती है। कोई नौकरी मांगता है, कोई धन, कोई स्वास्थ्य, कोई संतान तो कोई अपनी किसी परेशानी का समाधान। हम भगवान के सामने अपनी जरूरतें रखकर उनसे मदद की उम्मीद करते हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन भगवान के साथ हमारा रिश्ता केवल मांगने तक सीमित नहीं होना चाहिए।

कहा गया है कि आश्रम मंदिर में भगवान ने जैसे मुस्कुराकर पूछा कि तुम केवल मुझसे मांगने ही आते हो या कभी मुझसे मिलने भी आते हो? यह बात हमें अपने जीवन में जरूर सोचनी चाहिए। क्या हम भगवान के पास केवल अपनी परेशानियां लेकर जाते हैं या बिना किसी स्वार्थ के उनका सान्निध्य पाने भी जाते हैं?

भगवान को ATM नहीं, अपना आधार बनाएं

देवी नेहा सारस्वत कहती हैं कि भगवान को ATM नहीं, बल्कि अपना आधार बनाना चाहिए। ATM में हम जरूरत पड़ने पर जाते हैं और अपनी आवश्यकता के अनुसार पैसे निकालते हैं। ठीक उसी तरह अगर हम भगवान के पास भी केवल अपनी जरूरत पूरी कराने के लिए जाते हैं, तो हमारा रिश्ता एक तरह के लेन-देन जैसा हो जाता है। हमें भगवान से व्यापार नहीं, प्रेम करना चाहिए। भगवान को सब पता है कि हमारे जीवन में कब क्या चाहिए, किस समय क्या देना है और किस चीज की वास्तव में हमारे लिए आवश्यकता है। इसलिए हर बात के लिए भगवान के सामने मांगों की सूची रखने के बजाय उन पर विश्वास करना सीखना चाहिए।

भगवान से केवल भगवान को मांगिए

एक बहुत सुंदर बात कही गई है कि “हैरान हूं मैं अपनी हसरतों पर कि मैंने श्री बांके बिहारी से सब कुछ मांगा, केवल श्री बांके बिहारी को छोड़कर।” यह पंक्ति हमें अपने भीतर झांकने का अवसर देती है। हम भगवान से धन, सुख, सफलता, सुविधा और परेशानियों से मुक्ति तो मांगते हैं, लेकिन कभी यह नहीं कहते कि हे प्रभु, मुझे बस आपका प्रेम और आपका साथ चाहिए। वास्तव में अगर जीवन में भगवान का सच्चा साथ मिल जाए, तो फिर बाकी चीजों की कमी उतनी महसूस नहीं होती। इसलिए मंदिर जाएं तो केवल स्वार्थ लेकर नहीं, श्रद्धा और प्रेम लेकर जाएं।

भगवान पर भरोसा करना सीखें

जब हम भगवान को अपना आधार बना लेते हैं, तो जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी हमारा मन मजबूत रहता है। हमें विश्वास रहता है कि जो हो रहा है, उसमें भी भगवान की कोई न कोई इच्छा और सीख छिपी है। इसलिए भगवान के सामने अपनी इच्छाएं रखने से पहले उन्हें अपना समय, अपना प्रेम और अपना विश्वास दीजिए। उनसे कहिए कि प्रभु, मुझे वही दीजिए जो मेरे लिए उचित है और मुझे इतनी शक्ति दीजिए कि मैं हर परिस्थिति में आपका स्मरण कर सकूं। यही सच्ची भक्ति है। भगवान को पाने के बाद फिर किसी और चीज को पाने की इच्छा उतनी बड़ी नहीं रह जाती, क्योंकि जब जीवन में भगवान आ जाते हैं, तो मन को सबसे बड़ा सहारा मिल जाता है।

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देवी नेहा सारस्वत
जानिए गुरूजी के बारे मेंदेवी नेहा सारस्वत

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