Path of Devotion: भगवान की भक्ति करना निश्चित रूप से मनुष्य के जीवन को बदलने वाला मार्ग है, लेकिन भक्ति के साथ अपने मन को भी साफ करना जरूरी है।
Mystery of God: राजन जी महाराज बताते हैं कि हम सभी के मन में भगवान को पाने और उन्हें पहचानने की इच्छा होती है। जब पूछा जाता है कि किस-किस को भगवान मिले हैं, तो बहुत से लोग हाथ उठा देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि भगवान हमारे सामने होकर भी हम उन्हें पहचान नहीं पाते। केवल भगवान की कथा सुनना, उनका नाम लेना या उनकी भक्ति करना ही उन्हें पहचान लेने के लिए पर्याप्त नहीं है। भगवान को पहचानने के लिए सबसे जरूरी है मन की निर्मलता।
राजन जी महाराज भगवान श्रीराम के वचन का उल्लेख करते हुए कहते हैं “निर्मल मन जन सो मोहि पावा।” अर्थात जिसका मन निर्मल होता है, वही भगवान को प्राप्त कर सकता है। मन में जब तक स्वार्थ, अहंकार, ईर्ष्या, छल-कपट और सांसारिक इच्छाओं का बोझ रहता है, तब तक इंसान भगवान के करीब होकर भी उन्हें पहचान नहीं पाता। हम चाहे कितनी भी कथा सुनें या भक्ति करें, लेकिन जब तक अपने भीतर के विकारों को दूर करने का प्रयास नहीं करेंगे, तब तक भगवान की वास्तविक अनुभूति कठिन बनी रहेगी।
भक्ति के साथ मन की शुद्धता भी जरूरी
भगवान की भक्ति करना निश्चित रूप से मनुष्य के जीवन को बदलने वाला मार्ग है, लेकिन भक्ति के साथ अपने मन को भी साफ करना जरूरी है। हमें अपने व्यवहार, विचार और कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। दूसरों के प्रति प्रेम, दया, क्षमा और सच्चाई का भाव रखना ही धीरे-धीरे मन को निर्मल बनाता है। यह परिवर्तन एक दिन में नहीं होता। इसके लिए निरंतर प्रयास और भगवान की कृपा दोनों आवश्यक हैं।
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जब मन निर्मल होगा, भगवान स्वयं आएंगे
राजन जी महाराज कहते हैं कि हमें इस बात को गांठ बांधकर रखना चाहिए कि जिस दिन हमारा मन पूरी तरह निर्मल हो जाएगा, उस दिन हमें भगवान को खोजने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। बल्कि भगवान स्वयं हमें खोजते हुए हमारे पास आएंगे। जब हृदय में सच्ची भक्ति और निष्कपट प्रेम पैदा हो जाता है, तब भगवान की उपस्थिति हर जगह महसूस होने लगती है।
शबरी का उदाहरण
इस बात को समझाने के लिए शबरी का उदाहरण बहुत सुंदर है। शबरी भगवान श्रीराम को खोजने के लिए उनके पीछे नहीं गई थीं, बल्कि भगवान स्वयं शबरी की भक्ति से प्रभावित होकर उनके पास पहुंचे थे। यही सच्ची भक्ति की शक्ति है। इसलिए जीवन में भगवान को पाने से पहले अपने मन को निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए। जब मन साफ होगा, तब भगवान को ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि उनकी कृपा स्वयं जीवन में प्रकट होने लगेगी।