facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  pradeep mishra ji maharaj told what is the rule of offering two grains of rice during the shraddha paksha

Pradeep Mishra Ji Maharaj: श्राद्ध पक्ष में 2 चावल के दानों का क्या है नियम? प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shraddha Paksha: श्राद्ध पक्ष में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य श्रद्धा और भावना से किया जाए तो उसका विशेष महत्व माना जाता है। शिव पुराण की कथा सुनते समय किसी जीवात्मा के निमित्त चावल रखना भी इसी श्रद्धा से जुड़ा उपाय बताया गया है। 
 

Pradeep Mishra Ji Maharaj
Shiv Puran Remedy: श्राद्ध पक्ष को हिंदू धर्म में पितरों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान, दान और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसी संदर्भ में कथावाचक प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने शिव पुराण की कथा सुनने के दौरान दो चावल के दानों से जुड़ा एक उपाय बताया है, जिसे पितरों और दिवंगत जीवात्माओं के निमित्त करने की बात कही गई है।

प्रदीप मिश्रा जी महाराज कहते हैं कि यदि श्राद्ध पक्ष में शिव पुराण की कथा हो रही हो और आप कथा सुनने जा रहे हैं, तो अपने पास दो चावल के दाने रखकर कथा सुन सकते हैं। मान्यता के अनुसार, इन चावल के दानों को किसी जीवात्मा के निमित्त रखा जाता है। कथा समाप्त होने के बाद भी इन चावल के दानों को तुरंत फेंकने के बजाय बताए गए नियम के अनुसार उपयोग करने की बात कही गई है।

घर पर कथा सुन रहे हैं तो क्या करें?

यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध पक्ष में घर पर बैठकर शिव पुराण की कथा सुन रहा है, तो वह दो चावल के दानों को कथा सुनते समय अपने पास रख सकता है। इसके बाद प्रतिदिन उन चावल के दानों को छत पर रखने या डालने की परंपरा बताई गई है। इसका उद्देश्य किसी जीव के निमित्त श्रद्धा और समर्पण की भावना रखना माना जाता है।

पंडाल में कथा सुनने वालों के लिए उपाय

अगर श्राद्ध पक्ष में शिव पुराण की कथा किसी पंडाल में बैठकर सुनी जा रही है, तो दो चावल के दाने किसी जीवात्मा के निमित्त सात दिन तक अपने साथ रखने की बात कही गई है। सात दिन पूरे होने के बाद इन चावल के दानों को किसी उचित स्थान पर रखने की परंपरा बताई गई है।

चावल के दानों को कहां रखें?

प्रदीप मिश्रा जी महाराज के बताए अनुसार, सात दिन बाद इन चावल के दानों को किसी जलाशय के पास रखा जा सकता है या छत पर पक्षियों के लिए डाल सकते हैं। इसके अलावा घर में रखे परिंडे या पानी के मटके के पास भी इन्हें रखने की बात कही गई है। इसके पीछे भावना यह है कि ये अन्न किसी जीव के काम आए और जीवात्मा के निमित्त किया गया संकल्प पूर्ण हो।

इस उपाय के पीछे क्या मान्यता

श्राद्ध पक्ष में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य श्रद्धा और भावना से किया जाए तो उसका विशेष महत्व माना जाता है। शिव पुराण की कथा सुनते समय किसी जीवात्मा के निमित्त चावल रखना भी इसी श्रद्धा से जुड़ा उपाय बताया गया है। मान्यता है कि कथा का पुण्य और भगवान शिव की कृपा उस जीवात्मा तक पहुंचे, जिससे उसे शांति प्राप्त हो। कहा जाता है कि जब कोई जीवात्मा अपने अगले जन्म में जाती है और पूर्व जन्म के संबंधों का शुभ संस्कार बना रहता है, तो वह अपने संबंधियों पर कृपा, करुणा और दया बनाए रखती है। हालांकि, इस तरह के उपाय धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें श्रद्धा, सेवा और सद्भावना की भावना से करना चाहिए।

ये भी पढ़ें -  मंदिर में मूर्ति स्थापित करने से पहले क्यों होती है प्राण प्रतिष्ठा? जानिए पूरी धार्मिक विधि

पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज
जानिए गुरूजी के बारे मेंपंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel