God in Life: यदि जीवन में भगवान की कृपा चाहते हैं, तो नंद जैसा विश्वास और आनंद तथा यशोदा जैसा प्रेम और दूसरों को यश देने का भाव अपने भीतर विकसित करना चाहिए।
Spiritual Knowledge: साध्वी कृष्णप्रिया जी के अनुसार भगवान को अपने जीवन में बुलाने के लिए केवल पूजा-पाठ करना ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ हमारे भीतर ऐसे भाव और स्वभाव भी होने चाहिए, जो भगवान को प्रिय हैं। भगवान उन हृदयों में आते हैं, जहां प्रेम, विश्वास, आनंद, त्याग और दूसरों को सम्मान देने की भावना होती है। इसलिए यदि हम चाहते हैं कि हमारे जीवन में भगवान की कृपा बनी रहे, तो हमें अपने व्यवहार और स्वभाव में कुछ अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए।
साध्वी कृष्णप्रिया जी बताती हैं कि भगवान को अपने जीवन में बुलाने के लिए पहला स्वभाव नंद बाबा जैसा होना चाहिए। नंद कौन हैं? नंद वह हैं जो कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो, भगवान पर भरोसा रखते हैं और आनंद में रहते हैं। जीवन में सुख आए या दुख, सफलता मिले या असफलता, उनके मन में भगवान के प्रति विश्वास कम नहीं होता।
हमें भी अपने जीवन में ऐसा ही विश्वास रखना चाहिए। जब कोई परेशानी आए तो निराश होने के बजाय यह भाव रखना चाहिए कि प्रभु ने जो किया है, वह किसी न किसी कारण से हमारे हित में ही होगा। भगवान कभी गलत नहीं करते, यह विश्वास मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत बनाए रखता है।
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यशोदा जैसा रखें भाव
दूसरा स्वभाव यशोदा मैया का है। यशोदा का अर्थ यहां ऐसे भाव से है जिसमें व्यक्ति दूसरों को यश और सम्मान देने की कोशिश करता है। आज के समय में हम छोटी-सी उपलब्धि का भी श्रेय स्वयं लेने लगते हैं। थोड़ा-सा काम करते हैं, लेकिन उसकी चर्चा बहुत अधिक करते हैं। हमें लगता है कि लोग हमारी प्रशंसा करें और हमारे काम को पहचानें, लेकिन भगवान को ऐसा अहंकार पसंद नहीं है। हमें कर्म करते रहना चाहिए, लेकिन हर काम का श्रेय लेने की इच्छा छोड़नी चाहिए। जहां संभव हो, वहां दूसरों की प्रशंसा करनी चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए।
त्याग करना भी सीखें
जीवन में केवल पाने की इच्छा रखने से मन को शांति नहीं मिलती। कभी-कभी दूसरों की खुशी के लिए अपने अधिकार, अपनी प्रशंसा और अपने स्वार्थ का त्याग करना भी जरूरी होता है। जब मनुष्य बिना किसी अपेक्षा के अच्छा कर्म करता है, तब उसके भीतर सच्ची शांति और संतोष पैदा होता है।
भगवान को पाने का सरल मार्ग
यदि जीवन में भगवान की कृपा चाहते हैं, तो नंद जैसा विश्वास और आनंद तथा यशोदा जैसा प्रेम और दूसरों को यश देने का भाव अपने भीतर विकसित करना चाहिए। भगवान के प्रति विश्वास रखें, परिस्थितियों में प्रसन्न रहने का प्रयास करें, अच्छे कर्म करें और उनके बदले प्रशंसा की अपेक्षा न रखें। जब हृदय से अहंकार कम होगा और प्रेम, त्याग तथा समर्पण बढ़ेगा, तब हमारा जीवन स्वयं भगवान के लिए एक सुंदर स्थान बन जाएगा।