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जया किशोरी के 10 जीवन मंत्र: कर्म, आत्मनिर्भरता और परिवार की खुशियों से जुड़ी गहरी सीख

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
जया किशोरी जी
सार

Jaya Kishori Life Mantras: जया किशोरी ने प्रवचन के दौरान जीवन और परिवार को संतुलित रखने के सूत्र बताए।उन्होंने कहा कि “दूसरों पर निर्भर रहना ही दुख की जड़ है। अपनी खुशी का रिमोट हमेशा अपने पास रखें।

जया किशोरी
Jaya Kishori Life Lessons: मधुर मुस्कान और सरल शब्दों में गहरी जीवन की सीख यही जया किशोरी जी की पहचान है। मंगलवार को आगरा के सूरसदन में आयोजित प्रवचन के दौरान उन्होंने कर्म और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि “दूसरों पर निर्भर रहना ही दुख की जड़ है। अपनी खुशी और अपनी जरूरतें पूरी करने की जिम्मेदारी खुद उठाइए, वरना जीवनभर दुखी रहेंगे।” उन्होंने श्रोताओं को समझाया कि खुशियों का रिमोट हमेशा अपने पास ही रखना चाहिए।

प्रश्नोत्तर सत्र में जया किशोरी ने महिला विकास, परिवार और समाज पर बेबाकी से बात की। बेटियों और बेटों की शिक्षा व जिम्मेदारियों पर उन्होंने कहा कि असली सामंजस्य तभी आएगा जब घर-परिवार के कामकाज में पुरुष भी बराबरी से हाथ बंटाएं। बेटियों ने आत्मनिर्भरता का रास्ता इसलिए चुना क्योंकि उन्होंने अपनी माताओं को मेहनत के बाद भी ताने सुनते हुए देखा।

उन्होंने यह भी बताया कि सफल जीवन के लिए परिवार का सहयोग और घर का सुकून सबसे बड़ी पूंजी है। घर वही कहलाता है जहाँ लौटने पर मन शांत हो, न कि तनाव बढ़े। यदि परिवार में मतभेद हों तो संवाद ही समाधान है।सत्संगों और उपदेशों के बाद भी जब लोगों की सोच नहीं बदलती, तो इस पर उन्होंने कहा कि जैसे डॉक्टर दवा दे सकता है लेकिन खाना मरीज को ही पड़ता है, वैसे ही गुरु या प्रेरक वक्ता केवल मार्ग दिखा सकते हैं। अमल करना इंसान को खुद ही होगा।

धर्म और सनातन पर विचार

धर्मांतरण और अंतर्धार्मिक विवाह के सवाल पर जया किशोरी ने कहा कि “सम्मान सभी धर्मों का होना चाहिए, लेकिन सच्चा प्रेम अपने धर्म से ही होना चाहिए। जो अपने धर्म का नहीं हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘हिंदू माइथोलॉजी’ शब्द गलत है। ‘माइथोलॉजी’ का अर्थ है कल्पना या मिथक, जबकि सनातन धर्म प्रमाणों और शास्त्रों पर आधारित है। इसलिए सनातनी लोगों को इस शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
जया किशोरी

जया किशोरी की 10 प्रेरणादायक सीखें

-आध्यात्म केवल खुद के लिए नहीं, समाज के लिए भी होना चाहिए।
-जीवन में कर्म सबसे महत्वपूर्ण है, कर्तव्यों को छोड़ना धर्म नहीं।
-धन कमाइए लेकिन समाजहित के कार्यों में लगाइए।
-आत्मनिर्भर बनें, किसी पर पूरी तरह निर्भर न रहें।
-अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखें।
-अच्छे कर्म हमेशा लौटकर आते हैं, इसलिए सद्कर्म कीजिए।
-भक्ति की शुरुआत ईश्वर के प्रति समर्पण से होती है।
-अपनी कमियों को पहचानें और उन्हें दूर करने का प्रयास करें।
-परिवार की खुशी को सर्वोच्च स्थान दें।
- जया किशोरी जी ने अंत में सब को समझाते हुए कहा- हर व्यक्ति को ये तीन कौशल जरूर आने चाहिए ,इतना खाना बनाना कि खुद भूखे न रहें,इतनी सफाई करना कि गंदगी में न रहना पड़े, इतना काम करना कि दूसरों पर बोझ न बनना पड़े।

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