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Sawan Pradosh Vrat: सावन प्रदोष व्रत के दिन कैसे करें महादेव की पूजा? देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Pradosh Vrat Puja: सावन के इस पवित्र भौम प्रदोष व्रत पर श्रद्धा, संयम और विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण करें। मान्यता है कि महादेव की कृपा से जीवन के कष्ट कम होते हैं, बाधाएं दूर होती हैं और भक्त के मन में शांति आती है। 
 

Devkinandan Thakur Ji Maharaj
Bhagwan Shiva Puja Vidhi: सावन मास में आने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। 25 अगस्त को सावन मास का दूसरा प्रदोष व्रत पड़ रहा है, जिसे मंगलवार होने के कारण भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और भक्त को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज का कहना है कि शिव पुराण में प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। जो व्यक्ति प्रदोष काल में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शंकर की आराधना करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। प्रदोष व्रत को विधिपूर्वक रखने और शिव पूजन करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा भक्त के कष्टों को दूर करते हैं।

भौम प्रदोष से मंगल दोष में शांति

मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाता है। इसका संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से मंगल ग्रह से जुड़े अशुभ प्रभावों को शांत करने की मान्यता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष से संबंधित परेशानियां हैं, वे श्रद्धा के साथ भगवान शिव का पूजन और व्रत कर सकते हैं।

भूमि से जुड़े कार्यों में लाभ

भौम प्रदोष का संबंध भूमि और मंगल ग्रह से भी माना जाता है। ऐसे में भूमि, मकान या जमीन-जायदाद से जुड़े कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए इस दिन भगवान शिव की आराधना करना शुभ माना जाता है। भक्त सच्चे मन से महादेव का स्मरण करें और अपनी मनोकामना उनके चरणों में अर्पित करें।

25 अगस्त को इस समय करें पूजा

25 अगस्त को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का शुभ समय शाम 6 बजकर 25 मिनट से रात 8 बजकर 20 मिनट तक बताया गया है। इसी अवधि में शिवलिंग पर जल अर्पित करके भगवान शिव का अभिषेक करें, बेलपत्र, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें तथा माता पार्वती के साथ महादेव की आराधना करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र का जाप और आरती करें।

महादेव से करें सुख-शांति की प्रार्थना

देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज कहते हैं कि सावन के इस पवित्र भौम प्रदोष व्रत पर श्रद्धा, संयम और विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण करें। मान्यता है कि महादेव की कृपा से जीवन के कष्ट कम होते हैं, बाधाएं दूर होती हैं और भक्त के मन में शांति आती है। इसलिए इस पावन अवसर पर भगवान शिव से अपने और अपने परिवार के सुख, स्वास्थ्य, शांति एवं मंगल की प्रार्थना करें। महादेव सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें और सभी के जीवन को सुख, शांति एवं समृद्धि से भर दें। आप सभी के लिए यही प्रार्थना है कि यह पावन भौम प्रदोष आपके जीवन में शुभ और मंगल लेकर आए।

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