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Jaya Kishori Ji: जीवन में प्रेम के क्या हैं असली मायने? जया किशोरी जी ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

True Relationship: सच्चा प्रेम वही है जो दिल से निकले और बिना किसी स्वार्थ के किया जाए। इसमें दिखावा नहीं होता और न ही हर काम के बदले प्रशंसा या धन्यवाद की उम्मीद होती है। 
 

Jaya Kishori Ji
Importance of Love: जीवन में प्रेम केवल किसी के साथ रहने या उसके लिए बड़ी-बड़ी बातें करने का नाम नहीं है। सच्चा प्रेम वह भावना है, जिसमें हम बिना किसी दबाव के अपने प्रिय व्यक्ति की खुशी के बारे में सोचते हैं। जब किसी को खुश करने के लिए हमें बार-बार कहा जाए कि यह करो, वह करो, तभी हम कुछ करें, तो उसमें प्रेम की सहजता कम और मजबूरी अधिक दिखाई देती है।

जया किशोरी जी के विचारों का सार यही है कि असली प्रेम तब दिखाई देता है, जब सामने वाले को बार-बार अपनी जरूरत या इच्छा बतानी न पड़े। अगर मन में स्वयं यह भावना आए कि मुझे अपने प्रिय व्यक्ति के लिए कुछ अच्छा करना है, उसकी खुशी के लिए कुछ करना है, तो यही प्रेम की सच्ची अभिव्यक्ति है। किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए जब हम बिना कहे कोई छोटा-सा काम कर देते हैं, तो वह काम बहुत खास बन जाता है।

प्रेम में खुद को बेहतर बनाना

सच्चा प्रेम केवल दूसरे से कुछ पाने की इच्छा नहीं रखता, बल्कि खुद को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देता है। जब हम किसी से प्रेम करते हैं, तो मन में यह विचार आता है कि मुझे उसके लिए अच्छा इंसान बनना है। अपने व्यवहार में सुधार करना है, अपनी गलतियों को समझना है और अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए प्रयास करना है। यह बदलाव किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपने मन से होना चाहिए।

प्रेम और जबरदस्ती में अंतर

अगर किसी रिश्ते में हर छोटी बात के लिए कहना पड़े कि ऐसा करो, वैसा करो, मेरी खुशी के लिए यह काम करो, तो धीरे-धीरे प्रेम पर दबाव हावी होने लगता है। ऐसा रिश्ता प्रेम से ज्यादा जिम्मेदारी या गुलामी जैसा महसूस हो सकता है। प्रेम में अधिकार हो सकता है, लेकिन जबरदस्ती नहीं। सामने वाला अपनी इच्छा से कुछ करे, तभी उस काम में भावनाओं की सच्चाई महसूस होती है।

मन से किया जाता है प्रेम 

सच्चा प्रेम वही है जो दिल से निकले और बिना किसी स्वार्थ के किया जाए। इसमें दिखावा नहीं होता और न ही हर काम के बदले प्रशंसा या धन्यवाद की उम्मीद होती है। जब किसी की खुशी हमें अपनी खुशी जैसी लगने लगे और उसके लिए अच्छा करने की इच्छा भीतर से पैदा हो, तब समझना चाहिए कि हमारे मन में सच्चा प्रेम है। प्रेम मांगने की चीज नहीं, महसूस करने और निभाने की भावना है।

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