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Devi Maheshwari Ji: किशोरी जी का नाम लेते ही क्यों भर आती हैं आंखें, देवी माहेश्वरी जी ने बताया कारण

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक देवी माहेश्वरी जी (श्रीजी)
सार

Hindu Spirituality: भगवान तक पहुंचने का मार्ग ज्ञान, तर्क या बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और सच्चे भाव से खुलता है। जब भक्त पूरे विश्वास और समर्पण के साथ श्री किशोरी जी का नाम जपता है, तो उसका हृदय धीरे-धीरे महाभाव की ओर बढ़ने लगता है। 
 

Devi Maheshwari Ji
Radha Krishna Devotion: देवी माहेश्वरी जी बताती हैं कि भगवान की भक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका सबसे महत्वपूर्ण आधार भाव होता है। जब कोई भक्त श्रीरामचरितमानस की कथा सुनता है या भगवान का नाम जपता है, तो यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितने प्रेम और श्रद्धा के साथ ऐसा कर रहा है। यदि मन पूरी तरह भगवान में लगा हो, तो धीरे-धीरे यही साधारण भाव गहरा होकर महाभाव का रूप ले लेता है। यही महाभाव भक्त को ईश्वर के अत्यंत निकट पहुंचा देता है।

देवी माहेश्वरी जी कहती हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को रसराज कहा गया है, क्योंकि वे प्रेम, आनंद और दिव्य रस के स्रोत हैं। वहीं श्री किशोरी जी, अर्थात श्रीराधा रानी, महाभाव का स्वरूप हैं। उनका प्रेम इतना गहरा और पवित्र है कि संसार में उसकी तुलना किसी अन्य भावना से नहीं की जा सकती। जब कोई भक्त श्री किशोरी जी का स्मरण करता है, तो वह केवल नाम नहीं लेता, बल्कि उस दिव्य प्रेम से जुड़ने का प्रयास करता है जो आत्मा को ईश्वर से मिला देता है।

महाभाव की अवस्था शब्दों से परे

देवी माहेश्वरी जी कहती हैं कि जब साधक महाभाव की अवस्था में पहुंचता है, तब वहां शब्दों का कोई महत्व नहीं रह जाता है। उस स्थिति का अनुभव केवल महसूस किया जा सकता है। न तो उस अवस्था में पहुंचा व्यक्ति अपने अनुभव को पूरी तरह बता सकता है और न ही कोई दूसरा व्यक्ति उसे सुनकर पूरी तरह समझ सकता है। यह आत्मा और परमात्मा के मिलन का ऐसा अनुभव है, जिसे केवल हृदय से जिया जा सकता है।

नाम लेते ही छलक पड़ते हैं आंसू

देवी माहेश्वरी जी बताती हैं कि जब कोई भक्त एकांत में बैठकर पूरे मन से श्री किशोरी जी का नाम जपता है, तब उसके भीतर का प्रेम जागृत होने लगता है। उस समय किसी को यह कहने की आवश्यकता नहीं पड़ती कि वह रोए या अपनी भावनाएं व्यक्त करे। आंखों से आंसू अपने आप बहने लगते हैं। ये आंसू दुख के नहीं होते, बल्कि ईश्वर के प्रति गहरे प्रेम, समर्पण और आत्मिक आनंद के होते हैं। यह वही अवस्था है, जब भक्त का हृदय पूरी तरह श्री जी के प्रेम में डूब जाता है।

श्रीजी के नाम में छिपी है अद्भुत शक्ति

देवी माहेश्वरी जी के अनुसार श्री किशोरी जी के नाम में ही ऐसा दिव्य प्रभाव है, जो मन को सहज ही भक्ति में डुबो देता है। जब कोई सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, तो उसके भीतर की कठोरता समाप्त होने लगती है। मन शांत होता है, हृदय को कोमलता मिलती है और भगवान के प्रति प्रेम बढ़ने लगता है। यही कारण है कि कई भक्त केवल श्री जी का नाम सुनते ही भाव-विभोर हो जाते हैं और उनकी आंखों से प्रेम के आंसू बहने लगते हैं।

भक्ति का सबसे बड़ा आधार है सच्चा प्रेम

देवी माहेश्वरी जी का संदेश है कि भगवान तक पहुंचने का मार्ग ज्ञान, तर्क या बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और सच्चे भाव से खुलता है। जब भक्त पूरे विश्वास और समर्पण के साथ श्री किशोरी जी का नाम जपता है, तो उसका हृदय धीरे-धीरे महाभाव की ओर बढ़ने लगता है। यही वह अवस्था है, जहां भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं रह जाती। इसलिए श्री किशोरी जी का नाम लेते ही आंखों का भर आना किसी कमजोरी का नहीं, बल्कि गहरी भक्ति और ईश्वर के प्रति सच्चे प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

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