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Devi Chitralekha Ji: जीवन में अगर ऊंचाई मिले, तो विनम्र रहिए, देवी चित्रलेखा जी ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Life Lessons: जीवन में ऊंचाई मिलना निश्चित रूप से खुशी की बात है, लेकिन उस ऊंचाई पर टिके रहना उससे भी बड़ी बात है। इसके लिए विनम्रता, धैर्य और अच्छे संस्कार जरूरी हैं। 
 

Devi Chitralekha Ji
Spiritual Motivation: जीवन में हर व्यक्ति सफलता और ऊंचाई हासिल करना चाहता है। मेहनत करके जब इंसान अपने लक्ष्य तक पहुंचता है तो उसे खुशी और गर्व महसूस होना स्वाभाविक है। लेकिन सफलता मिलने के बाद इंसान का व्यवहार कैसा रहता है, यही उसके व्यक्तित्व की असली पहचान बनता है। देवी चित्रलेखा जी के अनुसार, जीवन में अगर ऊंचाई मिले तो हमेशा विनम्र रहना चाहिए। सफलता इंसान को बड़ा बनाने के लिए आती है, दूसरों से बड़ा दिखाने के लिए नहीं।

सफलता की चमक हर किसी को दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे की मेहनत बहुत कम लोग देख पाते हैं। जब कोई व्यक्ति ऊंचे मुकाम पर पहुंचता है तो लोग उसकी उपलब्धियों की चर्चा करते हैं, उसके सम्मान और पहचान को देखते हैं। लेकिन उस मुकाम तक पहुंचने के लिए उसने कितनी रातें जागकर मेहनत की, कितनी मुश्किलों का सामना किया और कितनी बार असफल होकर दोबारा शुरुआत की, यह कोई नहीं देखता।

सफलता का शोर भले ही बहुत ऊंचा हो, लेकिन सफलता तक पहुंचने का रास्ता हमेशा शांत और कठिन होता है। इसलिए जब जीवन में उपलब्धि मिले तो उस संघर्ष को कभी नहीं भूलना चाहिए, जिसने हमें उस मुकाम तक पहुंचाया।

सफलता सिर चढ़े तो गिरने लगता है इंसान 

कई बार सफलता मिलने के बाद इंसान के व्यवहार में बदलाव आने लगता है। उसे अपने सामने दूसरे लोग छोटे दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे अहंकार उसके अंदर जगह बना लेता है और वह उन लोगों को भूल जाता है, जिन्होंने उसके संघर्ष के दिनों में उसका साथ दिया था। यही वह समय होता है जब सफलता इंसान के लिए कमजोरी बन सकती है। जब सफलता सिर पर चढ़ जाती है तो व्यक्ति अपने आसपास के लोगों से दूर होने लगता है। अहंकार उसे वास्तविकता से दूर कर देता है और यही पतन की शुरुआत बन सकती है।

सफलता दिल में उतरे तो बड़ा बनता है इंसान 

वहीं अगर सफलता मिलने के बाद इंसान के अंदर विनम्रता और संवेदनशीलता बढ़ती है, तो उसकी सफलता सार्थक हो जाती है। सच्ची ऊंचाई केवल पद, पैसा या प्रसिद्धि हासिल करने में नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति सम्मान बनाए रखने में है। जब सफलता दिल में उतरती है तो इंसान अपने अनुभवों से दूसरों की मदद करता है, जरूरतमंदों का हाथ थामता है और अपने व्यवहार में सरलता बनाए रखता है। ऐसा व्यक्ति अपनी उपलब्धियों के कारण नहीं, बल्कि अपने संस्कारों और व्यवहार के कारण बड़ा बनता है।

विनम्रता ही सफलता की असली पहचान

जीवन में ऊंचाई मिलना निश्चित रूप से खुशी की बात है, लेकिन उस ऊंचाई पर टिके रहना उससे भी बड़ी बात है। इसके लिए विनम्रता, धैर्य और अच्छे संस्कार जरूरी हैं। इंसान कितना भी बड़ा मुकाम हासिल कर ले, उसे यह याद रखना चाहिए कि जीवन में आगे बढ़ने में अनेक लोगों और परिस्थितियों का योगदान होता है। इसलिए सफलता मिलने पर घमंड करने के बजाय आभार व्यक्त करना चाहिए। अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और दूसरों का सम्मान करना चाहिए। यही विनम्रता इंसान को भीतर से मजबूत बनाती है और उसकी सफलता को लंबे समय तक कायम रखने में मदद करती है।

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देवी चित्रलेखा जी
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