Ashwini And Revati Nakshatra : हमारे खगोल शास्त्र में नक्षत्र का विशेष महत्व है, क्योंकि नक्षत्र का अर्थ है 'जो कभी नष्ट न हो'। जब कोई बच्चा जन्म लेता है, तो उसमें नक्षत्र का विशेष महत्व होता है।
Ashwini And Revati Nakshatra : हमारे खगोल शास्त्र में नक्षत्र का विशेष महत्व है, क्योंकि नक्षत्र का अर्थ है 'जो कभी नष्ट न हो'। जब कोई बच्चा जन्म लेता है, तो उसमें नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। नक्षत्र को देखकर जातक के कर्म भाव और लग्न भाव तथा उसके भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है।
ज्योतिष और खगोल शास्त्र के अनुसार, नक्षत्र का मानव जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। रेवती नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण में जन्म लेने वाला जातक तथा अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ चरण में जिन बच्चों का जन्म होता है वह निश्चित रूप से बड़ा राजनीतिक गुरु, बड़ा अधिकारी और सभी सुख-सुविधाओं से संपन्न होते हैं। इसके साथ ही समाज में अधिक प्रतिष्ठा भी प्राप्त करने वाले होते हैं।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला बच्चे बनते हैं बड़े अधिकारी
वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुरु का अर्थ होता है उपदेश देने वाला और जिसके अंदर अधिक योग्यता हो, वही किसी को कुछ बता सकता है या कुछ दे सकता है। अर्थात जिसके पास देने योग्य कुछ हो। गुरु को बृहस्पति भी कहते हैं। हालांकि गुरु और भी अधिक शक्तिशाली तब होंगे जब बृहस्पति मीन राशि में प्रवेश करेंगे, तब वह और भी अधिक शक्तिशाली और शुभ होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मीन राशि के अंत में रेवती नक्षत्र होता है। ऐसे में रेवती नक्षत्र में जन्म लेने वाला बच्चा अच्छे पद पर जाते हैं साथ ही साथ ये बड़े होकर बड़ा राजनीतिक गुरु भी बनते है।
अश्विनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे बनते हैं सफल
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन बच्चों का जन्म अश्विनी नक्षत्र में होता है वो भी एक सफल इंसान बनते हैं। बता दें कि अश्विनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में जन्म लेने वाले बच्चे आगे जाकर खूब तरक्की करते हैं। क्योंकि अश्विनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे मेष राशि के अंतर्गत आते हैं। मेष राशि का स्वामी मंगल है। मंगल को सेनापति ग्रह कहा जाता है। जिसके कारण अश्विनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे भी आगे बढ़ने और पद-प्रतिष्ठा पाने में सफल होते हैं।