Ramayana Story: रामायण के सुंदरकांड की एक प्रमुख और रोमांचक घटना अक्षय कुमार का वध है। अक्षय कुमार, लंकापति रावण का सबसे छोटा और परम प्रतापी पुत्र था। हनुमान जी द्वारा उसका वध किया जाना केवल एक राक्षस का अंत नहीं था, बल्कि रावण के अहंकार पर पहली बड़ी चोट थी।आइए जानते हैं कि हनुमान जी ने अक्षय कुमार का वध क्यों और किन परिस्थितियों में किया था
माता सीता की खोज और अशोक वाटिका का विध्वंस
माता सीता की खोज करते हुए हनुमान जी लंका पहुँचे और उन्होंने अशोक वाटिका में उन्हें ढूंढ निकाला। माता सीता को श्री राम का संदेश देने और उनसे चूड़ामणि लेने के बाद, हनुमान जी को तीव्र भूख लगी। उन्होंने माता सीता से वाटिका के वृक्षों से फल खाने की अनुमति मांगी।अनुमति मिलने के बाद, हनुमान जी ने न केवल फल खाए, बल्कि रावण के बल को परखने और उसे सचेत करने के लिए अशोक वाटिका के विशाल वृक्षों को उखाड़ना और उजाड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने वाटिका के सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया।
रावण का पहला कदम और अक्षय कुमार का आगमन
जब वाटिका के रक्षकों ने रावण को सूचना दी कि एक विशाल वानर ने पूरी अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया है और प्रहस्त के पुत्र जम्बुमाली सहित कई पराक्रमी राक्षसों को मार डाला है, तो रावण क्रोधित हो उठा।रावण ने अपने सबसे छोटे पुत्र अक्षय कुमार को हनुमान जी को बंदी बनाने या उनका वध करने के लिए भेजा। अक्षय कुमार केवल १६ वर्ष की आयु का था, लेकिन वह अत्यंत पराक्रमी, युद्ध कला में निपुण और दिव्य अस्त्रों से सुसज्जित था। उसे ब्रह्मा जी से एक अभेद्य रथ और कभी न खत्म होने वाले बाणों का तरकश वरदान में मिला था।
हनुमान जी और अक्षय कुमार का भयंकर युद्ध
अक्षय कुमार अपने दिव्य रथ पर सवार होकर, भारी सेना के साथ अशोक वाटिका पहुँचा। उसने हनुमान जी को देखते ही उन पर बाणों की वर्षा शुरू कर दी।
अक्षय कुमार का पराक्रम: अक्षय कुमार ने अपनी अद्भुत धनुर्विद्या का प्रदर्शन करते हुए हनुमान जी पर अत्यंत तीखे बाण चलाए, जिससे हनुमान जी के शरीर से रक्त बहने लगा। हनुमान जी उसकी कम आयु के बावजूद उसके रणकौशल, फुर्ती और वीरता को देखकर मन ही मन उसकी प्रशंसा करने लगे।
हनुमान जी की रणनीति: हनुमान जी पहले तो उसके बाणों का सामना करते रहे, क्योंकि वे देखना चाहते थे कि रावण के पुत्रों में कितना बल है। लेकिन जब अक्षय कुमार के बाणों का वेग बहुत बढ़ गया और उसने हनुमान जी के ऊपर कई दिव्य अस्त्रों का प्रयोग करना शुरू किया, तब हनुमान जी ने समझ लिया कि इस बालक को कम आंकना भूल होगी।
वध का मुख्य कारण
अक्षय कुमार हनुमान जी को जीवित पकड़ने की बजाय उन पर प्राणघातक प्रहार कर रहा था। उसके पास ब्रह्मा जी का दिव्य रथ था, जिससे वह आकाश में उड़कर वार कर रहा था। यदि हनुमान जी शीघ्र ही उसका अंत न करते, तो वह अन्य दिव्य अस्त्रों का प्रयोग कर सकता था।यद्यपि अक्षय कुमार वीर था, लेकिन वह राक्षस संस्कृति और अधर्म का हिस्सा था। वह रावण के पापों में उसका भागीदार था। धर्म की स्थापना के लिए अधर्म के स्तंभों को गिराना आवश्यक था।अक्षय कुमार का वध रावण के लिए एक बहुत बड़ा मानसिक आघात था। रावण को अपनी शक्ति और अपनी संतान पर अटूट विश्वास था। हनुमान जी लंका में यह संदेश देना चाहते थे कि श्री राम का एक साधारण दूत ही जब उसके सबसे प्रतापी पुत्र का संहार कर सकता है, तो स्वयं प्रभु श्री राम की शक्ति का स्तर क्या होगा।
कैसे हुआ अक्षय कुमार का अंत?
जब युद्ध अपने चरम पर था, तब हनुमान जी ने एक विशाल हुंकार भरी और आकाश में उछलकर सीधे अक्षय कुमार के दिव्य रथ पर हमला कर दिया।
1. हनुमान जी ने सबसे पहले अपने एक जोरदार थप्पड़ से अक्षय कुमार के रथ के दिव्य घोड़ों को मार डाला।
2. इसके बाद उन्होंने रथ के सारथी को उठाकर फेंक दिया और रथ को पूरी तरह से नष्ट कर दिया।
3. रथ नष्ट होने पर अक्षय कुमार आकाश में ही तैरते हुए युद्ध करने लगा। तब हनुमान जी ने उसकी दोनों टांगें पकड़ीं और उसे हवा में तेजी से घुमाकर जमीन पर दे मारा।इस भीषण प्रहार से अक्षय कुमार के प्राण पखेरू उड़ गए और उसकी हड्डियां चूर-चूर हो गईं।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)