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Shivling Puja: पूजा के दौरान शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए और क्या नहीं? जानिए शास्त्रों के नियम

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shiva Devotion: भगवान शिव की पूजा में नियमों का पालन करना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक आवश्यक सच्ची श्रद्धा और विश्वास है। 
 

Shiva Devotion
Shivling Abhishek: सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। शिवलिंग भगवान शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक है और इसकी पूजा करने से मन की शांति, सुख-समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। हर सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं। हालांकि शास्त्रों में कुछ ऐसी वस्तुओं का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना शुभ माना गया है, वहीं कुछ वस्तुओं को अर्पित करने की मनाही भी बताई गई है। यदि पूजा शास्त्रों के अनुसार की जाए तो उसका फल अधिक शुभ माना जाता है।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

शिवलिंग पर सबसे पहले स्वच्छ जल अर्पित करना चाहिए। जल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है और इससे मन की शुद्धि का भी प्रतीकात्मक संदेश मिलता है। इसके बाद गंगाजल चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है। गंगाजल से अभिषेक करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता आती है। दूध से शिवलिंग का अभिषेक भी बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अलावा दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत बनाकर अभिषेक करना भी शुभ माना जाता है।

भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। पूजा के समय तीन पत्तियों वाला ताजा और साफ बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। इसके साथ धतूरा, आक के फूल, भांग, सफेद चंदन, सफेद फूल और मौसमी फल भी श्रद्धा के साथ चढ़ाए जा सकते हैं। इन सभी वस्तुओं का उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में मिलता है।

शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की पूजा में कुछ वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। सबसे पहले हल्दी को शिवलिंग पर चढ़ाने से बचना चाहिए। हल्दी का संबंध मुख्य रूप से सौभाग्य और स्त्री श्रृंगार से माना जाता है, इसलिए इसे शिवलिंग पर अर्पित नहीं किया जाता। इसी प्रकार सिंदूर भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता। सिंदूर विवाहित महिलाओं के सुहाग का प्रतीक है, जबकि शिवलिंग भगवान शिव के निराकार स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है।

केतकी का फूल भी भगवान शिव की पूजा में वर्जित माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार केतकी के फूल ने असत्य का साथ दिया था, जिसके कारण भगवान शिव ने इसे अपनी पूजा में स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा टूटे हुए बेलपत्र, बासी फूल, सड़े-गले फल या गंदी वस्तुएं भी कभी अर्पित नहीं करनी चाहिए।

पूजा के समय किन बातों का रखें ध्यान?

शिव पूजा हमेशा स्वच्छ मन और साफ वस्त्र पहनकर करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। अभिषेक करते समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करना सबसे शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर अर्पित की जाने वाली सभी सामग्री ताजा, स्वच्छ और श्रद्धा से अर्पित की जानी चाहिए। पूजा में दिखावा या केवल औपचारिकता की भावना नहीं होनी चाहिए। भगवान शिव को सच्ची भक्ति और निष्कपट मन सबसे अधिक प्रिय है। यदि किसी कारणवश सभी पूजन सामग्री उपलब्ध न हो, तो केवल जल अर्पित करके भी पूरी श्रद्धा से पूजा की जा सकती है।

सुख, शांति तथा सकारात्मकता 

भगवान शिव की पूजा में नियमों का पालन करना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक आवश्यक सच्ची श्रद्धा और विश्वास है। शास्त्रों के अनुसार जल, गंगाजल, दूध, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, भांग और चंदन जैसी वस्तुएं शिवलिंग पर अर्पित करना शुभ माना गया है। वहीं हल्दी, सिंदूर, केतकी का फूल, बासी फूल और अशुद्ध सामग्री चढ़ाने से बचना चाहिए। जब श्रद्धा, पवित्रता और शास्त्रों के नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव की आराधना की जाती है, तब उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति तथा सकारात्मकता का संचार होता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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