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Pradeep Mishra Ji Maharaj: घर बैठे मिलेगा तीर्थों की परिक्रमा का पुण्यफल, पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने बताया उपाय

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज
सार

Spiritual Benefits: भगवान तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास है। यदि किसी व्यक्ति के मन में ईश्वर के प्रति समर्पण है, तो वह घर बैठे भी आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकता है।
 

Pradeep Mishra Ji Maharaj
Tirth Yatra and Parikrama: सनातन धर्म में तीर्थों की यात्रा और उनकी परिक्रमा का विशेष महत्व माना गया है। अयोध्या, काशी, वृंदावन, उज्जैन, नर्मदा, गंगा और सरयू जैसे पवित्र स्थलों की परिक्रमा करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए समय, स्वास्थ्य या आर्थिक कारणों से इन सभी तीर्थों की यात्रा करना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे लोगों के लिए प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने एक बेहद सरल उपाय बताया है, जिसे घर पर रहकर भी करने से अनेक तीर्थों की परिक्रमा के समान पुण्यफल प्राप्त हो सकता है।

पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज कहते है कि यदि किसी के घर के आंगन, बगीचे या गमले में भी बेलपत्र का एक वृक्ष लगा हुआ है, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में बेलपत्र का वृक्ष भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बताया गया है। मान्यता है कि जहां बेलपत्र का वृक्ष होता है, वहां भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा और तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का दिव्य वास होता है। इसलिए ऐसे स्थान को किसी तीर्थ से कम नहीं माना जाता। इस कारण घर में लगा बेलपत्र का वृक्ष केवल एक पौधा नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

जब तीर्थ यात्रा संभव न हो तब क्या करें?

कई बार मन में इच्छा होती है कि अयोध्या, काशी, वृंदावन, उज्जैन, नर्मदा, गंगा या सरयू की परिक्रमा की जाए, लेकिन परिस्थितियां साथ नहीं देतीं। ऐसे समय में निराश होने की आवश्यकता नहीं है। पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज बताते हैं कि भगवान केवल बाहरी यात्रा नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति को स्वीकार करते हैं। यदि मन में विश्वास और भगवान के प्रति प्रेम है तो घर पर रहकर भी आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

प्रदोष काल में करें यह आसान उपाय

महाराज जी के अनुसार जब भी तीर्थों की परिक्रमा करने की इच्छा हो, उस दिन प्रदोष व्रत या प्रदोष काल का समय चुनें। प्रदोष काल भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय बेलपत्र के वृक्ष के पास जाकर पूरे श्रद्धा भाव से उसकी ग्यारह परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय "ॐ नमः शिवाय", "नमः शिवाय" या "श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्" मंत्र का निरंतर जाप करते रहें। मंत्रों का उच्चारण मन को एकाग्र करता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनता है।

परिक्रमा के बाद करें यह कार्य

ग्यारह परिक्रमा पूरी होने के बाद बेलपत्र के वृक्ष की जड़ के पास की पवित्र मिट्टी को श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर लगाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह मिट्टी भगवान शिव की कृपा और दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक होती है। ऐसा करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति स्वयं को ईश्वर के अधिक निकट अनुभव करता है। यह कार्य पूर्ण श्रद्धा और पवित्र भावना के साथ करना चाहिए।

श्रद्धा और विश्वास ही सबसे बड़ी पूजा

पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज का कहना है कि भगवान तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास है। यदि किसी व्यक्ति के मन में ईश्वर के प्रति समर्पण है, तो वह घर बैठे भी आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकता है। बेलपत्र के वृक्ष की प्रदोष काल में की गई ग्यारह परिक्रमा को अनेक पवित्र तीर्थों की परिक्रमा के समान फलदायी बताया गया है। हालांकि यह एक धार्मिक मान्यता है और इसका आधार श्रद्धा एवं आस्था है। जो लोग पूरी निष्ठा, विश्वास और भगवान शिव के स्मरण के साथ इस उपाय को करते हैं, उनके जीवन में आध्यात्मिक शांति, सकारात्मकता और ईश्वर की कृपा का अनुभव होने की मान्यता है।

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