facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  pitru paksha kauve ko poorvajo ka prateek kyo mana jata hai janiye katha

Pitru Paksha: कौवे को पूर्वजों का प्रतीक क्यों माना जाता है? जानिए कथा

jeevanjaliPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Pitru paksha:  हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। इस दौरान आपने शायद अपने घर के बुज़ुर्गों को छत या आँगन में कौवों के लिए खाना रखते देखा होगा।

Pitru paksha
Pitru paksha:  हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। इस दौरान आपने शायद अपने घर के बुज़ुर्गों को छत या आँगन में कौवों के लिए खाना रखते देखा होगा। ऐसी मान्यता है कि जब तक कोई कौवा आकर उस खाने को चख नहीं लेता तब तक श्राद्ध की रस्में अधूरी मानी जाती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि पूर्वजों को तर्पण देने के लिए कौवे को ही ज़रिया क्यों चुना गया? इस परंपरा के पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा है।

कौवे को पूर्वजों का प्रतीक क्यों माना जाता है?

गरुड़ पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कौवे को यमराज का संदेशवाहक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज कौवे के रूप में धरती पर आते हैं और यह भोजन ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि कौवे के माध्यम से अर्पित किया गया भोजन सीधे पूर्वजों की आत्माओं तक पहुँचता है और उन्हें शांति देता है। इसके अलावा कौवे भविष्य की घटनाओं का आभास करने की अपनी अद्भुत क्षमता के लिए भी जाने जाते हैं।

इससे जुड़ी पौराणिक कथा 

यह कहानी गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के अरण्य कांड की शुरुआती चौपाइयों में बताई गई है:

"सीता चरण चोंच हति भागा। मूढ़ मंदमति कारन कागा।"

अर्थ: उस मूर्ख और मंदबुद्धि जयंत ने कौवे का रूप धारण किया, माता सीता के चरणों में चोंच मारी और भाग गया।

पौराणिक कथा के अनुसार त्रेता युग में भगवान इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण किया और माता सीता के पैर में चोंच मारी जिससे खून बहने लगा। यह देखकर भगवान श्री राम ने घास के तिनके से एक बाण बनाया और उसे जयंत की ओर छोड़ा।

अपनी जान बचाने के लिए जयंत तीनों लोकों में भागा, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। आखिरकार, वह वापस लौटा, भगवान श्री राम और माता सीता के चरणों में गिर पड़ा और माफ़ी माँगी। हालाँकि भगवान श्री राम ने उसे माफ़ कर दिया, लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि बाण बेकार न जाए और जयंत की एक आँख फोड़ दी। इसके अलावा, श्री राम ने जयंत को यह वरदान दिया "आज से, तुम्हारे माध्यम से दिया गया भोजन पितरों तक पहुँचेगा और उन्हें तृप्ति प्रदान करेगा।" इसी के साथ पितृ पक्ष में कौओं को भोजन कराने की परंपरा की शुरुआत हुई।

पितृ दोष से मुक्ति और शुभ फल

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पितृ पक्ष में कौओं को भोजन कराने से कुंडली में मौजूद पितृ दोष और काल सर्प दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। कौओं को भोजन कराने से पितर प्रसन्न होते हैं और बदले में पूरे परिवार को सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं।

यह भी पढ़ें:-
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन के दिन बहनें जरूर करें इस मंत्र का जाप, मिलेगा आशीर्वाद 
Raksha Bandhan: इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर क्यों बांधा था रक्षा सूत्र? जानिए रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा 
Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर भगवान गणेश को सबसे पहले क्यों बांधी जाती है राखी? जानिए इस परंपरा की मान्यता 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel