Pitru Paksha 2026: सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। 16 दिनों की इस अवधि में, पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार पर उनके आशीर्वाद के लिए 'तर्पण' और 'पिंड दान' जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं।
Pitru Paksha 2026: सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। 16 दिनों की इस अवधि में, पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार पर उनके आशीर्वाद के लिए 'तर्पण' और 'पिंड दान' जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, इस समय पूर्वज पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों से भोजन और जल की इच्छा रखते हैं। इसलिए, उनके सम्मान में 'पिंड दान', 'श्राद्ध' और 'तर्पण' करने की परंपरा है। इन अनुष्ठानों के दौरान पूर्वजों को भोजन और जल अर्पित किया जाता है और ब्राह्मण को सम्मानपूर्वक भोजन कराकर उन्हें तृप्त किया जाता है। हिंदू धर्म में, श्राद्ध के दौरान अनामिका उंगली में 'कुश' घास पहनी जाती है; तर्पण के लिए इस्तेमाल होने वाले जल में काले तिल मिलाए जाते हैं और पूर्वजों को 'पिंड' अर्पित किए जाते हैं। आइए, इन प्रथाओं के पीछे के कारणों को समझते हैं।
श्राद्ध अनुष्ठानों के दौरान 'कुश' घास क्यों पहनी जाती है?
'कुश' एक विशेष प्रकार की घास है जिसे न केवल श्राद्ध अनुष्ठानों के दौरान, बल्कि अन्य धार्मिक समारोहों में भी पहना जाता है। माना जाता है कि इसमें शीतलता प्रदान करने और शुद्ध करने के गुण होते हैं इसलिए इसे 'पवित्री' भी कहा जाता है। मान्यता है कि 'कुश' पहनने से व्यक्ति पूजा-पाठ के लिए धार्मिक रूप से शुद्ध हो जाता है, इसीलिए शास्त्रों में अनुष्ठानों के दौरान इसके उपयोग का विधान है। इसके अलावा चिकित्सा विज्ञान अनामिका उंगली और हृदय के बीच संबंध बताता है अनामिका उंगली पर 'कुश' पहनने से मन शांत रहता है। इससे व्यक्ति शांत और स्थिर मन से श्राद्ध और तर्पण के अनुष्ठान कर पाता है।
तिल मिले जल से तर्पण क्यों किया जाता है?
पितृ पक्ष के दौरान तर्पण की निर्धारित विधि में जल में तिल मिलाना शामिल है। इसका कारण यह है कि शास्त्रों में तिल को 'देवान्न' कहा गया है और जल को मुक्ति का माध्यम बताया गया है। साथ ही तिल का दान बत्तीस 'सेर' सोने के रंग के तिल के दान के बराबर माना जाता है। इसलिए तिल के साथ जल अर्पित करने से पूर्वजों को संतुष्टि मिलती है।
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चावल से ही पिंड क्यों बनाए जाते हैं?
चावल को अक्षत कहा जाता है जिसका अर्थ है ऐसी चीज़ जो कभी टूटती या कम नहीं होती, और जिसके गुण कभी खत्म नहीं होते। इसके अलावा, चावल की तासीर ठंडी मानी जाती है यह शरीर को ठंडक और आराम देने वाला भोजन है। चावल से बने पिंड पूर्वजों को शांति पहुँचाने और उन्हें लंबे समय तक संतुष्ट रखने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं। ऐसी मान्यता भी है कि चावल का संबंध चंद्रमा से है और चंद्रमा के माध्यम से ही आपके द्वारा अर्पित किया गया पिंड आपके पूर्वजों तक पहुँचता है। हालाँकि पिंड बनाने के लिए चावल के अलावा अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। यदि चावल उपलब्ध न हों तो जौ के आटे से पिंड बनाए जा सकते हैं और यदि जौ का आटा भी न मिले, तो पूर्वजों को अर्पित करने के लिए केले और काले तिल का उपयोग करके भी इन्हें तैयार किया जा सकता है। यह भी पढ़ें-
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)