Pind Daan: अक्सर लोग सोचते हैं कि मरे हुए पूर्वज के लिए श्राद्ध की रस्में निभाने का अधिकार किसे है। क्या ये रस्में सिर्फ़ बेटा ही निभा सकता है, या बेटी भी इसमें शामिल हो सकती है?
Pind Daan: अक्सर लोग सोचते हैं कि मृत पूर्वज के लिए श्राद्ध की रस्में निभाने का अधिकार किसे है। क्या ये रस्में सिर्फ़ बेटा ही निभा सकता है, या बेटी भी इसमें शामिल हो सकती है? इन सवालों के जवाब जानना ज़रूरी है। गरुड़ पुराण के अनुसार, पिता का श्राद्ध आधिकारिक तौर पर उनके बेटे को ही करना चाहिए। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की सिर्फ़ बेटी है तो क्या वह श्राद्ध की रस्में निभा सकती है? श्राद्ध करना जिसमें पिंड दान भी शामिल है एक अहम धार्मिक कर्तव्य माना जाता है इसका मुख्य मकसद पूर्वजों का कर्ज चुकाना और मरे हुए व्यक्ति की आत्मा को शांति दिलाना है। आइए जानते हैं कि क्या बेटे की गैर-मौजूदगी में बेटी का श्राद्ध की रस्में निभाना सही है।
क्या बेटी अपने माता-पिता का श्राद्ध कर सकती है?
जब माता-पिता के लिए बेटी द्वारा श्राद्ध करने की बात आती है तो धार्मिक ग्रंथ और गरुड़ पुराण इसकी इजाज़त नहीं देते हैं। ऐसा सिर्फ़ इसलिए नहीं है कि हम पितृसत्तात्मक समाज में रहते हैं गरुड़ पुराण साफ़ तौर पर कहता है कि माता-पिता को मुक्ति और मोक्ष तभी मिलता है जब श्राद्ध बेटा करे। भले ही बेटी अपनी तसल्ली के लिए यह रस्म निभाना चाहे, इसे स्वीकार्य नहीं माना जाता है।
बेटे की गैर-मौजूदगी में श्राद्ध कौन कर सकता है?
अगर किसी व्यक्ति के लिए श्राद्ध की रस्में निभाने के लिए बेटा मौजूद नहीं है तो पत्नी उन्हें निभा सकती है। पत्नी को ये रस्में निभाने की इजाज़त तब मिलती है जब मरने वाले का कोई बेटा पोता या कोई और सीधा पुरुष वंशज यह काम करने के लिए मौजूद न हो। अगर किसी व्यक्ति का बेटा नहीं है तो बहू या पोता भी श्राद्ध कर सकता है। अगर इनमें से कोई भी मौजूद नहीं है तो बेटी का बेटा अपने नाना या नानी के लिए श्राद्ध कर सकता है और इसे सही माना जाता है। इन सभी लोगों की गैर-मौजूदगी में श्राद्ध की रस्में निभाने के लिए किसी पंडित को भी बुलाया जा सकता है।
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श्राद्ध करना क्यों ज़रूरी माना जाता है?
माना जाता है कि किसी भी मृत व्यक्ति के लिए श्राद्ध की रस्म ज़रूरी है। पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज धरती पर आते हैं और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को मोक्ष मिल सकती है। अगर श्राद्ध न किया जाए, तो मृतक की आत्मा अतृप्त रह जाती है। श्राद्ध या तर्पण न करने से घर में पितृ दोष लग सकता है और बिना वजह की परेशानियाँ आ सकती हैं। इसके उलट सही नियमों के अनुसार श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और घर पर आए कष्ट दूर होते हैं। माना जाता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद श्राद्ध करना इसलिए ज़रूरी है ताकि वंशजों पर कोई आध्यात्मिक कष्ट न आए और पूर्वजों को प्रसन्न किया जा सके। यह भी पढ़ें-
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)