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Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी पर गृहस्थ रखेंगे 32 घंटे का उपवास, जानें शुभ तिथि व पारण मुहूर्त

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Nirjala Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाता है। इस व्रत का पूरे साल इंतजार किया जाता है क्योंकि यह एकमात्र ऐसा व्रत है

Nirjala Ekadashi 2025
Nirjala Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाता है। इस व्रत का पूरे साल इंतजार किया जाता है क्योंकि यह एकमात्र ऐसा व्रत है, जिसे रखने से साल की सभी 24 एकादशी व्रत रखने का पुण्य प्राप्त होता है। इस साल निर्जला एकादशी व्रत 2 दिन रखा जाएगा। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिन निर्जला एकादशी स्मार्त होगी और दूसरे दिन निर्जला एकादशी हो जो वैष्णव धर्म को मानने वाले लोग करेंगे। पंचांग के अनुसार गृहस्थ लोग निर्जला एकादशी का व्रत 32 घंटे 21 मिनट तक रखेंगे। इस दौरान उन्हें अन्न और जल का सेवन नहीं करना होगा। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और महत्व क्या है? 

निर्जला एकादशी का हरि वासर 7 जून को सुबह 11:25 बजे समाप्त होगा। ऐसे में निर्जला एकादशी व्रत दो दिन का होगा। निर्जला एकादशी स्मार्ट व्रत 6 जून को होगा, जबकि निर्जला एकादशी वैष्णव व्रत 7 जून को रखा जाएगा।

निर्जला एकादशी व्रत स्मार्त तिथि: 6 जून दिन शुक्रवार को है।
निर्जला एकादशी व्रत वैष्णव धर्म के लिए 7 जून 2025 दिन शनिवार को है।

निर्जला एकादशी व्रत 2 दिन क्यों होता है?

एकादशी व्रत में हरि वासर का महत्व है। हरि वासर से पहले व्रत नहीं तोड़ा जाता। गृहस्थ लोग हरि वासर की समाप्ति के बाद एकादशी व्रत तोड़ते हैं, जबकि वैष्णव लोग द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के समय एकादशी व्रत तोड़ते हैं। कभी-कभी एकादशी तिथि और हरि वासर का समय होने के कारण एकादशी व्रत दो दिन का हो जाता है। 

गृहस्थ लोग रखेंगे 32 घंटे का व्रत

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल निर्जला एकादशी व्रत गृहस्थों के लिए 32 घंटे 21 मिनट का होगा। बता दें कि व्रत का समय सूर्योदय से लेकर व्रत खोलने के समय तक माना जाता है। गृहस्थों का व्रत 6 जून को सूर्योदय के समय 05:23 बजे शुरू होगा, जो 7 जून को व्रत खोलने के समय 01:44 बजे समाप्त होगा।

स्मार्त और वैष्णव एकादशी व्रत में अंतर

जब एकादशी व्रत दो दिन का होता है, तो पहले को स्मार्त और दूसरे को वैष्णव कहते हैं। स्मार्त व्रत गृहस्थों द्वारा रखे जाते हैं, जबकि वैष्णव व्रत वैष्णव संप्रदाय से संबंधित विष्णु भक्तों द्वारा रखे जाते हैं। गृहस्थ लोग वैष्णव व्रत भी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें व्रत के सभी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

निर्जला एकादशी 2025 मुहूर्त

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 6 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन पूजा का सबसे अच्छा समय रवि योग में सुबह के 5 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह के 06 के 34 मिनट के बीच है। रवि योग में कोई दोष नहीं होता है। उस समय हस्त नक्षत्र होता है। इसके अलावा आप राहुकाल को छोड़कर सुबह 10:36 से दोपहर 12:20 बजे तक पूजा कर सकते हैं।

वैदिक पंचांग के अनुसार, 7 जून को एकादशी की पूजा के लिए शुभ समय सुबह के 05 बजकर 23 मिनट से लेकर 09 बजकर 40 मिनट तक बहुत ही शुभ समय है। इस समय द्विपुष्कर योग है, जिसमें किए गए काम का दोगुना फल मिलता है। हालांकि, 8 जून को सुबह 09:40 से 05:23 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग है। इस योग में भी पूजा करना अच्छा है, इसमें आपके काम सफल साबित होंगे।

निर्जला एकादशी 2025 पारण समय

निर्जला एकादशी व्रत स्मार्ट पारण समय: 7 जून 2025 को दोपहर 01 बजकर 44 मिनट से लेकर शाम को 04 बजकर 31 मिनट के बीच तक है।
निर्जला एकादशी व्रत वैष्णव पारण समय: 8 जून 2025 को सुबह 05 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह के 07 बजकर 17 मिनट तक है।

निर्जला एकादशी व्रत के लाभ

निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और उस व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। पांचों पांडवों में से भीमसेन ने भी निर्जला एकादशी का व्रत रखा था, जिसके कारण निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

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