Shardiya Navratri : नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना पूरे श्रद्धा-भाव से की जाती है। इन नौ दिनों के दौरान भक्त पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ देवी के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि की शुरुआत घरों और मंदिरों में कलश स्थापना से होती है जिसके बाद रोज़ाना पूजा, आरती और देवी के किसी खास रूप को भोग चढ़ाया जाता है। इस दौरान कई भक्त व्रत रखते हैं और सात्विक भोजन करते हैं। नवरात्रि पूजा की परंपरा सिर्फ़ धार्मिक रीति-रिवाजों तक ही सीमित नहीं है इसमें साफ़-सफ़ाई, आत्म-संयम, सेवा और भक्ति पर भी ज़ोर दिया जाता है। अष्टमी या नवमी के दिन, कई घरों में कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें छोटी बच्चियों को देवी का रूप मानकर पूजा की जाती है उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार या दक्षिणा दी जाती है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि के पहले दिन आपको क्या करना चाहिए।
नवरात्रि के पहले दिन करने योग्य कार्य
सही समय पर कलश स्थापना
अगर आपने नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना करने का संकल्प लिया है तो सुनिश्चित करें कि यह तय मुहूर्त के भीतर ही हो। देर से उठना और शुभ समय के बाद घट स्थापना करना उचित नहीं माना जाता है।
साफ़ कपड़े पहनना
ब्रह्म मुहूर्त में उठें स्नान करें और साफ़ सफ़ेद कपड़े पहनें। कपड़े नए हों या पुराने उन्हें साबुन से अच्छी तरह धोकर और ठीक से सुखाकर पहनना चाहिए ऐसे कपड़े पहनें जिनसे आपको सकारात्मक महसूस हो।
घर की सफ़ाई
घर में काम करने वाले लोग चाहे किसी भी समय आएं, परिवार के सदस्यों को जल्दी उठकर पूरे घर की और खासकर पूजा स्थल की अच्छी तरह सफ़ाई करनी चाहिए। देवी के आगमन के दिन घर बिल्कुल साफ़-सुथरा होना चाहिए।
व्रत रखना
अगर आप पूरे नौ दिनों तक व्रत नहीं रख सकते तो आप पहले दिन व्रत रखने का विकल्प चुन सकते हैं। नियमों का पालन करते हुए और अच्छे काम करते हुए पूरे दिन व्रत रखें। अपने मन को पवित्र रखें और नकारात्मक विचारों को मन में न आने दें देवी दुर्गा ऐसे कार्यों से प्रसन्न होती हैं।
देवी दुर्गा के नाम का जाप करें।
पूरे दिन अपने काम करते हुए भी मन ही मन देवी दुर्गा के नाम का जाप करते रहें। ऐसा करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
बड़ों का आशीर्वाद लें
हालांकि आप नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा की पूजा कर रहे होंगे लेकिन घर के बड़ों का आशीर्वाद लेना और उनकी सेवा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह पूजा का सबसे बड़ा रूप है जिसे हर किसी को अपनाना चाहिए।
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत कैसे हुई?
माना जाता है कि भगवान राम ने शारदीय नवरात्रि मनाने की शुरुआत की थी। समुद्र के किनारे शारदीय नवरात्रि की पूजा-अर्चना करने वाले वे पहले व्यक्ति थे। लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले राम ने लगातार नौ दिनों तक शक्ति की देवी की पूजा की थी। यही कारण है कि शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की नौ दिनों की पूजा के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है।
शारदीय नवरात्रि का महत्व
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार शारदीय नवरात्रि देवी दुर्गा की पूजा करने का सबसे शुभ समय है। इन पवित्र दिनों में हर दिन देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है वह अपने भक्तों को सुख शक्ति और ज्ञान प्रदान करती हैं। नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी के एक विशिष्ट रूप को समर्पित होता है और प्रत्येक रूप की कृपा विभिन्न इच्छाओं को पूरा करने में मदद करती है। नवरात्रि का त्योहार शक्ति की पूजा का उत्सव है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।