Kundli Mein Santan Yog: माना जाता है कि दांपत्य जीवन का सबसे बड़ा सुख संतान सुख होता है। जिस घर में बच्चों की किलकारियां गूंजती हैं, उस घर में सभी देवी-देवता वास करते हैं।
Kundli Mein Santan Yog: माना जाता है कि दांपत्य जीवन का सबसे बड़ा सुख संतान सुख होता है। जिस घर में बच्चों की किलकारियां गूंजती हैं, उस घर में सभी देवी-देवता वास करते हैं। कई दंपत्तियों को शादी के तुरंत बाद ही संतान सुख मिल जाता है, लेकिन कई दंपत्तियों को संतान सुख के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। संतान सुख की प्राप्ति का संबंध ज्योतिष से भी है।
माना जाता है कि कुछ ग्रह ऐसे होते हैं, जो अगर कुंडली में मेहरबान हो जाएं तो जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है, यहां तक कि जुड़वा बच्चे भी पैदा हो सकते हैं। हालांकि, कुछ ग्रह ऐसे भी होते हैं, जो अगर कुंडली में नीच स्थान पर हों तो संतान सुख मिलने में काफी समय लग सकता है। आइए इस खबर में जानते हैं कि किस ग्रह के मेहरबान होने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र
अगर शादी के बाद संतान सुख नहीं मिल रहा है तो समझ लीजिए कि पति या पत्नी की कुंडली में ग्रह निश्चित तौर पर अनुकूल नहीं हैं। अगर कुंडली में ग्रह अनुकूल नहीं हैं तो संतान योग में बाधा आती है। उस बाधा को समाप्त करने के लिए ज्योतिष में ग्रह शांति के लिए पूजा-पाठ, हवन आदि का सहारा लिया जाता है।
इस ग्रह की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है
पंचांग के अनुसार कुंडली का पांचवां भाव संतान का होता है। यदि जातक की कुंडली में गुरु और शुक्र पंचम या सप्तम भाव में हों या दोनों ग्रह केंद्र में हों तो दंपत्ति को तुरंत संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही मिथुन या धनु राशि में गुरु, सूर्य और बुध की दृष्टि हो तो जुड़वा संतान की प्राप्ति हो सकती है।