Janmashtami Pujan: साल 2025 में इस बार जन्माष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। चलिए जान लेते हैं जन्माष्टमी के विशेष मुहूर्त...
Krishna Janmashtami 2025 Puja Vidhi and Paran Samay: भाद्रपद माह की पावन अष्टमी तिथि पर सम्पूर्ण जगत आनंदमय हो उठता है, जब नंद के आनंदकंद, माखनचोर, मोहन श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। शंख-घंटी की गूंज, भजन-कीर्तन की मधुर धुन और प्रेम व भक्ति से सजी झांकियां इस पर्व को अलौकिक बना देती हैं। इस वर्ष जन्माष्टमी पर विशेष योग और शुभ मुहूर्त का संयोग भक्तों के लिए अत्यंत मंगलकारी रहेगा। श्रद्धालु इस दिन शुभ मुहूर्त में लड्डू गोपाल का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। खास बात यह है कि इस बार जन्माष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। चलिए जान लेते हैं जन्माष्टमी के विशेष मुहूर्त-
16 अगस्त विशेष मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04 बजकर 24 मिनट से 05:07 मिनट तक रहेगा।
अभिजित मुहूर्त: 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।
विजय मुहूर्त: 02 बजकर 37 मिनट से 03 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त: 06 बजकर 59 मिनट से 07 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के निशिता काल में हुआ था। इसी परंपरा के अनुसार इस वर्ष पूजन का शुभ समय होगा। 17 अगस्त को 12 बजकर 04 मिनट AM से 12 बजकर 47 मिनट AM (कुल अवधि: 43 मिनट) रहेगी।
व्रत पारण का समय
अर्धरात्रि पूजन के बाद: 17 अगस्त, 12:47 AM से पहले व्रत का पारण किया जा सकता है।
सूर्योदय के बाद: 17 अगस्त, 05:51 AM के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।
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जन्माष्टमी पूजा के नियम
जन्माष्टमी के दिन प्रातः स्नान के बाद संकल्प लेकर व्रत रखें। दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत करना श्रेष्ठ माना गया है।
पूजा से पहले स्नान करें, साफ और पवित्र वस्त्र पहनें, पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
श्रीकृष्ण पूजन में मन, वचन और कर्म से पूर्ण श्रद्धा रखना आवश्यक है।
भगवान का जन्म पूजन अष्टमी तिथि के निशिता काल (अर्धरात्रि) में करना सबसे शुभ है।
मांस, मदिरा व तामसिक भोजन से दूर रहें – इस दिन सात्विकता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
दिनभर श्रीकृष्ण भजन, मंत्र जप और कथा श्रवण करें।
जन्माष्टमी पूजन विधि
घर के मंदिर या साफ स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें, उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं।
चौकी पर श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप (लड्डू गोपाल) या उनकी मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
पूजन प्रारंभ करने से पहले स्वयं को शुद्ध करें और आचमन करें।
भगवान को नए वस्त्र पहनाएं, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और आभूषण से सजाएं।
अष्टगंध, चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसीदल अर्पित करें।
माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिष्ठान का भोग लगाएं।
अर्धरात्रि के निशिता काल में भगवान का जन्म करें, शंख, घंटी और नगाड़े बजाएं।
पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें और स्वयं ग्रहण करें।
आइए, इस जन्माष्टमी हम सब मिलकर नंदलाल का स्वागत करें, उनके जन्मोत्सव में दीप-धूप, पुष्प और प्रेम से आराधना करें। भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।