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Janmashtami 2026: 'आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की...' जन्माष्टमी पर जरूर पढ़ें ये आरती

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Janmashtami 2026 Aarti: आज, 16 अगस्त को पूरे भारत में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। 

जन्माष्टमी
Lord Krishna Aarti: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर भक्त अपने लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करते हैं और मध्यरात्रि में विशेष पूजा के साथ श्री कृष्ण की आरती गाते हैं। इस जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में डूबने के लिए 'आरती कुंजबिहारी की' जरूर पढ़ें और गाएं। 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

हिंदू धर्म में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में भजन-कीर्तन और रासलीला का आयोजन होता है, और मध्यरात्रि में शंखनाद के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल 16 अगस्त को जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त निशीथ काल में रात 12:04 से 12:47 बजे तक रहेगा।

श्रीकृष्ण जी की आरती

 
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।  
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।  
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।  
लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,  
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की।  
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।  
गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,  
ग्वालिन संग; अतुल रति गोप कुमारी की।  
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।  
स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच,  
हरै अघ कीच; चरन छवि श्री बनवारी की।  
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।  
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद,  
कटत भव फंद; टेर सुन दीन भिखारी की।  
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

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