Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आते ही मंदिरों से लेकर घरों तक कान्हा की भक्ति का रंग दिखाई देने लगता है। कहीं बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं, तो कहीं उनके लिए झूला सजाया जाता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को उनकी प्रिय मानी जाने वाली चीजों का भोग लगाने की भी विशेष परंपरा है। माखन-मिश्री, बांसुरी, मोरपंख और गाय से लेकर वैजयंती माला तक कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिनका संबंध भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी लीलाओं से माना जाता है। क्या आपको पता है कि इन चीजों का श्रीकृष्ण के जीवन से क्या संबंध है और इन्हें इतना खास क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं कान्हा की प्रिय 5 चीजों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में...
माखन-मिश्री
भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री बेहद प्रिय माना जाता है। बाल्यकाल में कान्हा के माखन चुराने की लीलाएं श्रीकृष्ण की कथाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। गोकुल और वृंदावन में वे गोपियों के घरों से माखन चुराकर खाते थे। इसी वजह से उन्हें माखन चोर भी कहा गया। माखन को भगवान कृष्ण के प्रिय भोग के रूप में अर्पित करने की परंपरा आज भी चली आ रही है। जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाने से भक्त विशेष प्रसन्नता अनुभव करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माखन भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और उनके सरल, चंचल स्वरूप से जुड़ा हुआ है।
बांसुरी
श्रीकृष्ण की पहचान उनकी बांसुरी के बिना अधूरी मानी जाती है। भगवान कृष्ण जब वृंदावन में बांसुरी बजाते थे, तो उसकी मधुर धुन से गोपियां, ग्वाल-बाल और पशु-पक्षी तक आकर्षित हो जाते थे। कृष्ण की बांसुरी उनकी वृंदावन की लीलाओं का अभिन्न हिस्सा रही है। धार्मिक रूप से बांसुरी को भगवान कृष्ण के प्रेम और मधुरता से जोड़ा जाता है। जन्माष्टमी पर कान्हा के श्रृंगार में बांसुरी रखना शुभ माना जाता है। कई भक्त पूजा के दौरान भगवान कृष्ण को बांसुरी अर्पित भी करते हैं।
मोरपंख
भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में लगा मोरपंख उनकी सबसे अलग पहचान में शामिल है। कृष्ण के सिर पर सजा मोरपंख उनके बाल स्वरूप और वृंदावन की लीलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। कृष्ण की अनेक मूर्तियों और चित्रों में उनके मुकुट पर मोरपंख जरूर दिखाई देता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोरपंख भगवान कृष्ण को अत्यंत प्रिय था। यही वजह है कि जन्माष्टमी के अवसर पर कान्हा के मुकुट में मोरपंख सजाया जाता है। भक्त इसे भगवान कृष्ण के श्रृंगार का विशेष हिस्सा मानते हैं और पूजा में भी मोरपंख अर्पित करते हैं।
गाय
भगवान कृष्ण का गायों से गहरा संबंध माना जाता है। बचपन में वे गोकुल और वृंदावन में ग्वाल-बालों के साथ गाय चराने जाते थे। इसी वजह से उन्हें गोपाल और गोविंद जैसे नामों से भी जाना जाता है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में गायों और बछड़ों का विशेष उल्लेख मिलता है। हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है और भगवान कृष्ण से भी इसका विशेष संबंध है। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा के साथ गाय की पूजा करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। कृष्ण के गोपाल स्वरूप को याद करते हुए भक्त गायों को चारा खिलाते हैं और उनकी सेवा करते हैं।
वैजयंती माला
भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में वैजयंती माला का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक कथाओं में श्रीकृष्ण के गले में वैजयंती माला धारण करने का उल्लेख मिलता है। इसे विशेष प्रकार के फूलों से बनी माला माना जाता है और कृष्ण के श्रृंगार से जोड़ा जाता है। वैजयंती माला को भगवान कृष्ण के प्रिय आभूषणों में गिना जाता है। जन्माष्टमी पर बाल गोपाल का श्रृंगार करते समय भक्त उन्हें फूलों की माला पहनाते हैं। मंदिरों में भी श्रीकृष्ण की प्रतिमा को फूलों और मालाओं से सजाने की परंपरा है।
जन्माष्टमी पर इन चीजों का भोग और श्रृंगार
जन्माष्टमी के दिन भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान कृष्ण का श्रृंगार करते हैं और उन्हें प्रिय मानी जाने वाली वस्तुएं अर्पित करते हैं। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा उनके मुकुट में मोरपंख लगाया जाता है और हाथ में बांसुरी सजाई जाती है। फूलों की माला से उनका श्रृंगार किया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा में इन वस्तुओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से भगवान के बाल और गोपाल स्वरूप से जुड़ी परंपराओं को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)