facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  jitiya vrat 2026 jitiya vrat ke dauran jitiya dhaga bachho ke liye kyo mana jata hai shubh

Jitiya Vrat 2026: जीवित्पुत्रिका व्रत के दौरान 'जितिया धागा' बच्चों के लिए क्यों माना जाता है शुभ

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Jitiya Vrat 2026: जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाली की कामना के साथ रखा जाता है। यह व्रत खास तौर पर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों में बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

Jitiya Vrat 2026
Jitiya Vrat 2026: जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाली की कामना के साथ रखा जाता है। यह व्रत खास तौर पर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों में बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस साल जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है।

जितिया की तीन दिन की परंपरा

जितिया व्रत की तैयारी 'नहाय-खाय' नाम की रस्म से शुरू होती है। इसके बाद, व्रत के मुख्य दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत से जुड़ी कथाओं में राजा जीमूतवाहन, गरुड़ और नाग शंखचूड़ की कहानियां शामिल हैं। धार्मिक दृष्टि से, यह व्रत मां के प्यार, त्याग और बच्चों की भलाई के लिए की गई प्रार्थना का प्रतीक माना जाता है।

बच्चों को जितिया का धागा क्यों पहनाया जाता है?

ज्योतिषी नितेश निरंजन बताते हैं कि कई इलाकों में जितिया पूजा के बाद बच्चों को लाल या खास 'जितिया धागा' पहनाने की परंपरा है। इलाके के हिसाब से इसे या तो गले में पहना जाता है या कलाई पर बांधा जाता है। आपको  बता दें कि  व्रत पूरा होने के बाद गले में लाल जितिया धागा पहनने की लोक परंपरा का ज़िक्र है।आम मान्यता के अनुसार, यह धागा बच्चे की लंबी उम्र, सेहत और सुरक्षा की कामना का प्रतीक है। गले में धागा पहनने की परंपरा मां और बच्चे के भावनात्मक जुड़ाव से भी जुड़ी है। हालांकि, चूंकि धागे से जुड़ी रस्में अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग होती हैं, इसलिए इसे पूरे हिंदू समुदाय के लिए कोई अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए। 

इसका धार्मिक महत्व क्या है?

जिवित्पुत्रिका व्रत  का मुख्य उद्देश्य बच्चों की भलाई के लिए प्रार्थना करना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत, पूजा, कथा-श्रवण और संकल्प के साथ-साथ पहना जाने वाला धागा इसी शुभ कामना का प्रतीक माना जाता है। कुछ जगहों पर पूजा के दौरान सरसों का तेल और खली चढ़ाने की भी परंपरा है; ऐसी आम मान्यता है कि पूजा के बाद इसे बच्चों के सिर पर लगाना शुभ होता है।

इस धागे को लेकर ज्योतिषीय मान्यताएं क्या हैं?

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि कोई विशेष धागा पहनने से बच्चे की आयु निश्चित रूप से बढ़ जाती है। धार्मिक परंपरा में, इसे संकल्प और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में देखना अधिक उचित है। अनुष्ठान के दौरान, माँ अपने बच्चे की भलाई के लिए प्रार्थना करती है और यह धागा उसी संकल्प की याद दिलाता है।

इसे कितने समय तक पहनना चाहिए?

जिवतिया का धागा कितने समय तक पहना जाए, इसके लिए शास्त्रों में कोई एक सर्वमान्य नियम नहीं है; अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में परंपराएं भिन्न-भिन्न हैं। इसलिए, इसे 24 घंटे, कुछ दिनों या उससे अधिक समय तक पहने रखने का चलन स्थानीय रीति-रिवाजों पर निर्भर करता है। इसी तरह, धागे को सम्मानपूर्वक कैसे विसर्जित किया जाए यानी इसे संभालकर रखा जाए या जल में प्रवाहित किया जाए इसकी परंपरा भी क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः, जिवतिया के धागे को किसी अनिवार्य धार्मिक नियम के बजाय, माँ के प्रेम, आशीर्वाद और बच्चे की भलाई के लिए की गई प्रार्थना पर आधारित एक लोक-धार्मिक परंपरा के रूप में समझना सबसे अच्छा है।


यह भी पढ़ें-

Shivling Parikrama: शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसका कारण 

Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व 

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है? जानिए धार्मिक मान्यता 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel