Kaal Sarp Dosh: सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र का विशेष महत्व है। कुंडली व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य के बारे में पूरी जानकारी देती है। कई ज्योतिषी भूतकाल के बारे में भी बताते हैं। कुंडली में आठ ग्रहों को दो भागों में बांटा गया है।
Kaal Sarp Dosh: सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र का विशेष महत्व है। कुंडली व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य के बारे में पूरी जानकारी देती है। कई ज्योतिषी भूतकाल के बारे में भी बताते हैं। कुंडली में आठ ग्रहों को दो भागों में बांटा गया है। अशुभ ग्रहों के कारण व्यक्ति को जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुंडली में काल सर्प दोष कब और कैसे लगता है और यह दोष क्यों कष्टकारी होता है? आइए इस खबर में विस्तार से जानते हैं।
राहु और केतु कौन हैं?
राहु और केतु दोनों ही मायावी ग्रह हैं। दोनों ही वक्री गति से चलते हैं। राहु और केतु डेढ़ साल तक एक राशि में रहते हैं। इसके बाद ये एक राशि से दूसरी राशि में चले जाते हैं। वर्तमान में राहु मीन राशि में और केतु कन्या राशि में विराजमान हैं। ज्योतिषियों के अनुसार मई माह में राहु और केतु राशि परिवर्तन करेंगे।
कैसे लगता है काल सर्प दोष?
राहु और केतु के कारण काल सर्प दोष लगता है। ज्योतिषियों के अनुसार, कालसर्प दोष तब होता है जब राहु और केतु के बीच सभी शुभ-अशुभ ग्रह मौजूद होते हैं। अनंत कालसर्प योग तब बनता है जब राहु लग्न में, केतु सप्तम भाव में हो और इन दोनों के बीच सभी शुभ-अशुभ ग्रह मौजूद हों। इसी तरह कालसर्प दोष भी कई तरह का होता है। कालसर्प दोष होने पर व्यक्ति को जीवन में कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।