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Guru Mahadasha: कितने वर्षों तक चलती है गुरु की महादशा, दुष्प्रभावों से बचने के लिए करें ये उपाय

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी
सार

Guru Mahadasha: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की महादशा का विशेष महत्व है और गुरु यानी बृहस्पति की महादशा को सबसे शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, समृद्धि और सौभाग्य का कारक ग्रह माना जाता है।

गुरु महादशा
Guru Mahadasha: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की महादशा का विशेष महत्व है और गुरु यानी बृहस्पति की महादशा को सबसे शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, समृद्धि और सौभाग्य का कारक ग्रह माना जाता है। यह ग्रह व्यक्ति के जीवन में शिक्षा, विवाह, संतान, धन और आध्यात्मिक उन्नति को प्रभावित करता है। हालांकि, गुरु की अशुभ स्थिति या दुष्प्रभाव के कारण जीवन में कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं। आइए जानते हैं कि गुरु महादशा की अवधि, बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के उपाय और दुष्प्रभावों से बचने के उपाय क्या है...
गुरु महादशा

गुरु महादशा की अवधि

ज्योतिष के अनुसार, प्रत्येक ग्रह की महादशा की एक निश्चित अवधि होती है, जो विमशोत्तरी दशा पद्धति पर आधारित है।
अवधि: गुरु की महादशा 16 वर्ष तक रहती है।
अंतर्दशा: इस 16 वर्ष की अवधि में विभिन्न ग्रहों की अंतर्दशाएं होती हैं, जैसे सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, केतु, शुक्र, शनि, बुध और स्वयं गुरु की अंतर्दशा। प्रत्येक अंतर्दशा की अवधि गुरु महादशा के कुल समय के अनुपात में होती है।
प्रभाव: यदि कुंडली में गुरु शुभ स्थिति में है, जैसे उच्च राशि (कर्क), स्वराशि (धनु, मीन) या केंद्र और त्रिकोण में तो यह महादशा समृद्धि, ज्ञान और सुख लाती है। वहीं, यदि गुरु नीच (मकर), शत्रु राशि या अशुभ भावों (6, 8, 12) में है तो यह चुनौतियां जैसे आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्याएं या पारिवारिक कलह ला सकती है। गुरु महादशा का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली में गुरु की स्थिति, गोचर और अन्य ग्रहों के संयोग पर निर्भर करता है।
 
गुरु महादशा

बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के उपाय

बृहस्पति देव को प्रसन्न करने से गुरु महादशा के शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

गुरु मंत्र जाप
बृहस्पति के बीज मंत्र "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः" या वैदिक मंत्र "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का 19,000 बार जाप करें। इसे गुरुवार से शुरू करें और 40 दिनों तक नियमित रूप से जाप करें। जाप के लिए पीली माला का उपयोग करें और पीले वस्त्र पहनें। जाप के दौरान मन में शुद्धता और भक्ति बनाए रखें।

गुरुवार व्रत
गुरुवार को बृहस्पति व्रत रखें। इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास करें और केवल सात्विक भोजन- जैसे केला, चने की दाल, हल्दी युक्त भोजन ग्रहण करें। व्रत के दौरान बृहस्पति कथा का पाठ करें और विष्णु-लक्ष्मी या बृहस्पति की पूजा करें। व्रत समाप्ति पर पीले रंग की मिठाई, जैसे बेसन के लड्डू, का भोग लगाएं।

बृहस्पति यंत्र पूजा
बृहस्पति यंत्र को घर के पूजा स्थल पर स्थापित करें। इसे गुरुवार को शुभ मुहूर्त में स्थापित करें और रोजाना इसकी पूजा करें। यंत्र पर हल्दी, केसर और पीले फूल चढ़ाएं। "ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। यह यंत्र गुरु की शुभता को बढ़ाता है और नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।

दान और सेवा
गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करें, जैसे चने की दाल, हल्दी, पीला कपड़ा, केला, पीली मिठाई। किसी विद्वान ब्राह्मण, गुरु या शिक्षक को भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें। गाय को गुड़ और चने की दाल खिलाएं, क्योंकि गुरु का संबंध गाय से भी माना जाता है।

विष्णु और बृहस्पति पूजा
बृहस्पति को देवगुरु माना जाता है और भगवान विष्णु के प्रति उनकी भक्ति प्रसिद्ध है। गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और तुलसी माला से "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। बृहस्पति मंदिर में जाकर उनकी मूर्ति पर केसर और पीले चंदन का तिलक लगाएं।

पीपल और केले के पेड़ की पूजा
गुरुवार को पीपल या केले के पेड़ की पूजा करें। पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और पीले सूत से सात परिक्रमा करें। पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं और बृहस्पति मंत्र का जाप करें।

आध्यात्मिक और शैक्षिक कार्य
गुरु ज्ञान और शिक्षा का कारक है। गुरु महादशा में किताबें दान करें, बच्चों की पढ़ाई में मदद करें या स्वयं नया कौशल सीखें। गुरुजनों, शिक्षकों और बुजुर्गों का सम्मान करें, क्योंकि यह बृहस्पति को प्रसन्न करता है।
 

गुरु महादशा के दुष्प्रभाव और बचाव के उपाय

यदि कुंडली में गुरु अशुभ स्थिति में है, जैसे नीच राशि, पाप ग्रहों के साथ युति, या छठे, आठवें, बारहवें भाव में तो गुरु महादशा के दौरान कुछ समस्याएं जैसे आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य समस्याएं, वैवाहिक कलह, शिक्षा में बाधा या मानसिक अशांति हो सकती हैं। इन दुष्प्रभावों से बचने के लिए कुछ उपाय जान लीजिए।
रोजाना माथे पर केसर का तिलक लगाएं। यह गुरु की शुभता को बढ़ाता है और नकारात्मक प्रभावों को कम करता है। केसर को दूध में मिलाकर पीने से भी गुरु का बल बढ़ता है।
ज्योतिषी से सलाह लेकर गुरुवार को पुखराज रत्न धारण करें। इसे सोने या चांदी की अंगूठी में तर्जनी उंगली में पहनें। रत्न धारण करने से पहले इसे गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें और बृहस्पति मंत्र का जाप करें।
गुरु महादशा के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए बृहस्पति हवन कराएं। हवन में पीली सरसों, हल्दी और घी का उपयोग करें। किसी योग्य पंडित से बृहस्पति ग्रह शांति पूजा करवाएं।
यदि गुरु पर मंगल या शनि का प्रभाव है तो मंगलवार को हनुमान चालीसा और शनिवार को शनि मंत्र "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" का जाप करें। शनि मंदिर में काले तिल और तेल का दान करें।
गुरु महादशा में झूठ, छल और अनैतिक कार्यों से बचें, क्योंकि ये गुरु के दुष्प्रभाव को बढ़ाते हैं। मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूर रहें।

 
गुरु महादशा

गुरु दोष निवारण टोटके

  • यदि आर्थिक परेशानियां हों तो गुरुवार को पीले कपड़े में 7 केले बांधकर किसी मंदिर में दान करें।
  • स्वास्थ्य समस्याओं के लिए पीले कपड़े में हल्दी की 7 गांठें बांधकर बहते पानी में प्रवाहित करें।
  • वैवाहिक जीवन में समस्याओं के लिए पति-पत्नी मिलकर गुरुवार को विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें।

गुरु महादशा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

बृहस्पति को देवगुरु कहा जाता है, जो ज्ञान, धर्म और नैतिकता का प्रतीक है। उनकी कृपा से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, सत्य का मार्ग और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। गुरु कुंडली में पंचम यानी संतान, शिक्षा, सप्तम यानी विवाह, नवम यानी भाग्य और एकादश भावों को प्रभावित करता है। शुभ गुरु इन क्षेत्रों में सफलता देता है, जबकि अशुभ गुरु बाधाएं उत्पन्न करता है। गुरु महादशा में व्यक्ति समाज में सम्मान, नेतृत्व और विद्वता प्राप्त करता है। यह समय शिक्षा, व्यवसाय और पारिवारिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है।

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