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Govardhan Puja: गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को कौन-सा भोग लगाना है शुभ? जानें नियम और महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Bhagwan Krishna Bhog: गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को भोग अर्पित करना प्रकृति, अन्न और गौवंश के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है।
 

Govardhan Puja Rituals
Govardhan Puja Rituals: दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार पर भगवान की कृपा बनी रहती है। इस दिन 56 भोग लगाने की भी परंपरा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को कौन-कौन से भोग लगाने शुभ माने जाते हैं और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गोवर्धन पूजा पर लगाएं अन्नकूट का भोग

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाना सबसे विशेष माना जाता है। अन्नकूट का अर्थ है अलग-अलग प्रकार के अन्न और पकवानों का समूह। इस दिन घरों और मंदिरों में कई तरह की सब्जियां, दाल, चावल, पूड़ी, कढ़ी और मिठाइयां बनाकर भगवान को अर्पित की जाती हैं। मान्यता है कि अन्नकूट का भोग लगाने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों को अन्न-धन की कमी नहीं होती।

भगवान कृष्ण को लगाएं ये शुभ भोग

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। भगवान कृष्ण को माखन अत्यंत प्रिय है। इसके अलावा उन्हें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत का भोग भी लगाया जाता है। इस दिन खीर, मालपुआ, लड्डू, पेड़ा, जलेबी और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां भी भगवान को अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ही पूड़ी, कचौड़ी, हलवा, चावल और मौसमी सब्जियों का भोग लगाने की परंपरा है। भगवान को केले, सेब, अनार, अमरूद और अन्य मौसमी फलों का भोग भी लगाया जा सकता है।

56 भोग लगाने की क्या है परंपरा?

गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा भी काफी प्रचलित है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था, तब वे लगातार सात दिनों तक बिना भोजन किए खड़े रहे थे। इसके बाद ब्रजवासियों ने उनके प्रति प्रेम और आभार व्यक्त करने के लिए आठ पहर के हिसाब से सात दिनों के 56 भोग अर्पित किए थे। तभी से भगवान कृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा चली आ रही है।

भोग लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान को भोग लगाते समय साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोग तैयार करते समय सात्विक सामग्री का इस्तेमाल करें। भोजन में लहसुन और प्याज का प्रयोग न करें। सबसे पहले भगवान कृष्ण को भोग अर्पित करें और इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों तथा अन्य लोगों में बांटें। भोग लगाते समय भगवान कृष्ण का स्मरण करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करें। यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति 56 प्रकार के पकवान ही बनाए। आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार माखन-मिश्री, फल या घर में बने सात्विक भोजन का भोग भी लगा सकते हैं।

भोग लगाने का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को भोग अर्पित करना प्रकृति, अन्न और गौवंश के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि अन्न का सम्मान करना चाहिए और प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान कृष्ण की पूजा और भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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